मरदह। विकासखंड मरदह के ग्राम पंचायत पारा, फत्तेपुर और रसूलाबाद में संयुक्त रूप से तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी प्रभाकर पांडेय पर एक ग्रामीण ने सरकारी आवास दिलाने के नाम पर व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए घूस वसूलने तथा गलत तथ्यों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर जिलाधिकारी गाजीपुर को दिए गए शिकायती पत्र के बाद अब विभागीय जांच शुरू हो गई है। जांच की खबर फैलते ही ब्लॉक क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
शिकायतकर्ता जयप्रकाश यादव, निवासी किशुनपुर गोपाल, रसूलाबाद ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि उनकी माता मंजू देवी की मृत्यु 10 जुलाई 2025 को हुई थी। आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा श्मशान घाट की रसीद के आधार पर 30 जुलाई 2025 को ऑनलाइन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराया गया, जिसमें सरकारी सुविधाओं और बीमा लाभ से संबंधित गलत विवरण दर्ज किया गया।
आवास के नाम पर रुपये लेने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी ने सरकारी आवास दिलाने का भरोसा देकर उससे घूस लिए। उस समय संबंधित सचिव के पास एडीओ पंचायत का अतिरिक्त प्रभार भी होने की बात शिकायत में कही गई है। बाद में जब ग्रामीण ने आवास आवंटन सूची में अपना नाम देखा तो उसका नाम सूची में नहीं मिला।
पीड़ित के मुताबिक, इस संबंध में सचिव से पूछताछ करने पर पहले एक-दो महीने में आवास निर्माण शुरू होने का आश्वासन दिया गया। लेकिन रकम वापस मांगने पर कथित तौर पर धमकी देने और जेल भेजवाने की बात कहने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर रुपये लेने का भी आरोप शिकायत में लगाया गया है। पीड़ित ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले सचिव समेत अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
डीएम के निर्देश पर शुरू हुई जांच
शिकायत का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी कार्यालय से 17 जुलाई 2026 को जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को नियमानुसार कार्रवाई के लिए पत्र अग्रसारित किया गया था। मामले की जांच के लिए तत्कालीन स्तर पर बीडीओ बिरनो को जिम्मेदारी दी गई, लेकिन उनके तबादले के बाद प्रकरण आगे नहीं बढ़ सका।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने दोबारा जिलाधिकारी से गुहार लगाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब खंड विकास अधिकारी मरदह को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। बीडीओ ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की, जिसके बाद एडीओ पंचायत और एडीओ एसटी द्वारा जांच शुरू की गई।
खंड विकास अधिकारी सुवेदिता सिंह ने बताया कि, “शिकायत के आधार पर जांच प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी गई है।”
फिलहाल नए आरोपों की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजे जाने के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

