कासिमाबाद। सोनबरसा ग्राम पंचायत में नाली निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तकनीकी आपत्तियों के बावजूद आम रास्ते की खुदाई कर नाली निर्माण की कार्रवाई शुरू करा दी गई, जिससे आवागमन और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी कासिमाबाद को सामूहिक प्रार्थना पत्र सौंपकर निष्पक्ष स्थलीय जांच, तकनीकी परीक्षण और स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 को नायब तहसीलदार कौशल चौरसिया की मौजूदगी में ब्लॉक के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर जेसीबी से खुदाई कराई गई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रारंभ में शंकर चौहान के घर से रामजीत के घर होते हुए पहले से बनी नाली तक पानी की निकासी कराने पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में दूसरे मार्ग पर खुदाई शुरू कर दी गई।
जेई ने भी जताई थी तकनीकी कठिनाई
ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में दावा किया है कि मौके पर मौजूद जेई (टीए) संदीप चौहान ने प्रस्तावित नाली से जलनिकासी को लेकर तकनीकी कठिनाई की बात कही थी। इसके बावजूद खुदाई कराए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी रूप से जलनिकासी संभव नहीं है तो भविष्य में नाली बेकार साबित हो सकती है और सड़क का स्तर प्रभावित होने के साथ आम लोगों के आवागमन में भी परेशानी पैदा हो सकती है।
पोखरी की जमीन को बताया स्थायी जलनिकासी का विकल्प
ग्रामीणों ने नाली विवाद का स्थायी समाधान पोखरी की भूमि में तलाशने की मांग की है। उनका कहना है कि चौहान बस्ती के पानी की निकासी के लिए पोखरी की जमीन उपयुक्त विकल्प हो सकती है।
प्रार्थना पत्र में खाता संख्या 378, गाटा संख्या 208, रकबा 0.046 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि इसमें करीब 0.020 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा है। ग्रामीणों ने पूर्व में हुई 28 नवंबर 2020 की बेदखली कार्रवाई का हवाला देते हुए पोखरी की भूमि का दोबारा स्थलीय सत्यापन कराने और यदि कब्जा पाया जाए तो उसे नियमानुसार कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
जांच तक कार्रवाई रोकने की गुहार
ग्रामीणों ने एसडीएम से मांग की है कि पहले मौके की निष्पक्ष जांच कराई जाए, प्रस्तावित नाली की तकनीकी व्यवहार्यता की रिपोर्ट तैयार कराई जाए और इसके बाद ही निर्माण को लेकर निर्णय लिया जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक नाली निर्माण की कार्रवाई रोकने और आम रास्ते को सुचारु रखने की मांग की गई है।
सामूहिक प्रार्थना पत्र पर सरफराज अहमद, इम्तियाज अहमद, खुर्शीद, इकबाल अहमद, फारूक अहमद, आशुतोष यादव, शमीम अहमद, महताब आलम, मोहम्मद अयूब समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
अब निगाहें प्रशासन की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

