बारावफात पर नगर कस्बा बाजार में जुलूस निकालकर उत्साह पूर्वक मनाया
जमानियां। ईद-ए-मिलाद उन नबी इसका बहुत महत्व और इतिहास है। बारावफात इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल में मनाया जाता है। ये दिन पैगंबर मोहम्मद की पैदाइश के दिन के तौर पर याद किया जाता है। बारावफात पर मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। इसी को लेकर नगर कस्बा बाजार स्थित शाही जामा मस्जिद सहित मोहल्ला कानूनगो स्थित दारुल उलूम रजाए हबीब मदरसा सहन से जुलूस निकाली गई। जो मोहल्ला दूरहिया एवं पठान टोली मोहल्ला होते पूरे मुस्लिम इलाकों में जुलूस को भ्रमण कराते हुए। कस्बा बाजार, एनएच 24 होते पुनः दारुल उलूम मदरसा रजाए हबीब सहन पहुंचकर जुलूस को समाप्त किया गया। इस दौरान ईद ए मिलाद उन नबी जुलूस का मुस्लिम अलका के लोगों द्वारा जगह जगह जुलूस पर गुलाब के फूल से (इस्तकबाल)) स्वागत किया गया। इस दौरान जुलूस में शामिल सभी बड़े छोटे लोगों में सिरनी के तौर पर मीठी जर्दा (तस्कीम) वितरण किया गया। बता दें कि बरावफात को मिलाद-उन-नबी भी कहते हैं। ये दिन पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद की यौमे पैदाइश (जन्मदिन) के तौर पर मनाया जाता है। बारावफात इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल में मनाया जाता है। हालांकि, पैगंबर मुहम्मद के जन्म की सही तारीख मुस्लिम समुदाय के सुन्नी और शियाया संप्रदायों के अनुसार अलग-अलग है। सुन्नी रबी-अल-अव्वल के 12वें दिन को पैगंबर मुहम्मद की जन्मतिथि मानते हैं। जबकि शिया रबी-अल-अव्वल के 17वें दिन उनकी जन्मतिथि मानते हैं। मिलाद-उन-नबी का शाब्दिक अर्थ है। पैगंबर का जन्म. हालांकि, इस दिन को मौलिद के नाम से भी मनाया जाता है। मौलिद अरबी मूल का शब्द है, जिसका अर्थ है, जन्म देना। बारावफात (ईद-ए-मिलादुन्नबी) बुधवार, 26 अगस्त 2026 को पड़ने की संभावना है। वास्तविक तिथि रबी अल-अव्वल महीने के चांद दिखने के आधार पर तय होगी। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल की 12 वीं तारीख को मनाया जाता है। इसे पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म और वफात के दिन के रूप में याद किया जाता है।इस मौके पर मुस्लिम समुदाय द्वारा जुलूस निकाली गई।और मस्जिदों तथा घरों में विशेष इबादत की गई। है। उक्त मौके पर शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा, हाफिज तौहीद रजा, जैनुलआब्दीन, दानिश मंसूरी, अहद नेहाल शेख मंसूरी, अमन शांति एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार खान वारसी, इजहार खान, आरिफ खान वारसी, हयात खान वारसी, नेहाल मंसूरी, मोहम्मद असलम पान वाले, मेराज मंसूरी, फैयाज मंसूरी, एजाज मंसूरी, बेलाल मंसूरी, अरशद मंसूरी, जमाल मंसूरी, कमाल मंसूरी, कैफ मंसूरी, वैस मंसूरी, एडवोकेट मेराज हसन, ताबिश मंसूरी, मोहम्मद अकील अजहर, आसिफ मंसूरी, आरिफ मंसूरी, रुस्तम अली, ताबिश अली, शमीम खान, माहिर कमाल अंसारी, एम कमालुद्दीन अंसारी, हाजी नूरुद्दीन अंसारी, इरफान खान, आसीम खान, उर्फ सोनू पंडित, इरफान खान, नेहाल खान, मोहम्मद सैयर खान वारसी, मोहम्मद रोहान मंसूरी, शाहिद जमाल मंसूरी, मोहम्मद रहबर मंसूरी, मोहम्मद अर्स मंसूरी, जाहिद मंसूरी, शमीम फरीदी, महफूज आलम, बसपा कार्यकर्ता शोएब खान, रामनिवास प्रसाद, संजीत यादव, सहित सैकड़ों मुस्लिम बंधु शामिल रहे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोतवाली पुलिस जुलूस के साथ साथ मुस्तैद होकर चलते रहे। उक्त मौके पर एसडीएम सुश्री निधि, क्षेत्राधिकारी अंकित तिवारी, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राम सजन नागर, उपनिरीक्षक दिनेश सिंह, अनूप कुमार राय, सुधीर शुक्ला, मुकुल मिश्रा, रतन कुमार सरोज, दीपक मिश्रा, कंपनी कमांडर रविकान्त सिंह, अखिलेश कुमार सहित आदि तैनात रहे।

