गाज़ीपुर। मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र के थाना नोनहरा के ग्राम चकमकसूद मुडेरा में भूमि और रास्ते को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर अराजी संख्या 76 और 77 से जुड़े विवाद में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी/कास्तकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है और रास्ते को लेकर भी विवाद खड़ा किया जा रहा है।वीडियो देखे 🙏
शिकायत पत्र के अनुसार, ग्रामीणों का कहना है कि अराजी संख्या 77 में पट्टाधारकों की भूमि है, जबकि कुछ लोग खाली जमीन पर कब्जा कर करकट, मड़ई आदि डालकर वहां रह रहे हैं और पशु बांधकर जीवन-यापन कर रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संबंधित लोगों के नाम वर्तमान खतौनी में दर्ज नहीं हैं, बावजूद इसके वे जमीन पर अपना अधिकार जताने का प्रयास कर रहे हैं।
वीडियो देखे 🙏ग्रामीणों ने हरिनारायण, भरत राम और उषा देवी समेत कुछ अन्य लोगों पर उनकी लगभग 5 मंडा भूमि पर कथित जबरन कब्जे का आरोप लगाया है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि भूमि विवाद को लेकर राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से बार-बार अलग-अलग तरीके से नाप-जोख कराई जा रही है, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
रास्ते को लेकर भी बढ़ा विवाद
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 को नगीना राम, उमराव, रामकेवल, जितेंद्र, पंकज और अंगद सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अराजी संख्या 76 की भूमि से जुड़े पुराने रास्ते को बंद करने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोग स्वयं को पीडब्ल्यूडी कर्मचारी बताते हुए मौके पर पहुंचे और रास्ता बनाने के लिए जिलाधिकारी के आदेश का हवाला दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने कथित आदेश दिखाने की मांग की तो मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी दी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि विवाद को लेकर पहले भी कई बार मारपीट हो चुकी है और फौजदारी के मुकदमे दर्ज हैं।
जिलाधिकारी से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की मौके पर जांच कराकर यथास्थिति बनाए रखने, विवादित रास्ते पर तत्काल रोक लगाने तथा पुराने रास्ते को पूर्व की तरह चालू कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अराजी संख्या 76 से संबंधित कथित अवैध कब्जे की जांच कराकर भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग भी उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद के कारण परेशान हैं। अब उनकी निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।



