गाजीपुर। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बालवाटिकाओं में अध्ययनरत 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के नौनिहालों की शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत विशेष पहल की गई है। राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश के निर्देश पर संबंधित विद्यालयों में प्री-प्राइमरी शिक्षा से जुड़ी आवश्यक शिक्षण-सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
विद्यालय स्तर पर बच्चों के उपयोग के लिए हिंदी अभ्यास पुस्तिका (वर्कबुक), बिग बुक, कलाकिट, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड, बालवाटिका हस्तपुस्तिका (टीचर गाइड) और निपुण तालिका सहित अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जानी है। इसका उद्देश्य नौनिहालों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय गतिविधि आधारित एवं आनंददायक तरीके से सीखने का अवसर प्रदान करना है।
राज्य परियोजना कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों में उपलब्ध कराई गई सामग्री की उपलब्धता और वितरण की नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उपलब्ध सामग्री का बच्चों को शत-प्रतिशत लाभ मिले और बालवाटिकाओं में शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं रोचक बने।
इस क्रम में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने जिले के संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्री-प्राइमरी शिक्षण सामग्री की स्थिति की समीक्षा करने तथा जहां भी कमी हो, वहां आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नौनिहालों की बुनियाद मजबूत करने पर जोर
प्री-प्राइमरी स्तर पर बच्चों को उम्र के अनुरूप सीखने, खेलने, चित्रकारी और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए उपलब्ध कराई जा रही यह सामग्री उनकी भाषाई, बौद्धिक, सामाजिक और रचनात्मक क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि सरकारी विद्यालयों से जुड़े आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में संसाधनों की उपलब्धता केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक लाभ प्रत्येक बच्चे तक पहुंचे।
प्रशासन की निगरानी में अब लक्ष्य साफ है—हर नौनिहाल को मिले सीखने का बेहतर माहौल, गतिविधियों से जुड़े और मजबूत हो उसकी शिक्षा की नींव।

