गाजीपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं निपुण भारत मिशन के अंतर्गत पूर्वप्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने तथा 3 से 6 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से जनपद में स्थित बालवाटिकाओं को प्रभावी एवं क्रियाशील बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
शासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विद्यालयों में संचालित बालवाटिकाओं में खेल आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण वातावरण विकसित किया जाएगा। बच्चों के शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक, नैतिक एवं सांस्कृतिक विकास के साथ-साथ प्रारंभिक भाषा, साक्षरता एवं संख्याज्ञान के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बालवाटिकाओं में बच्चों के लिए सुरक्षित कक्षा-कक्ष/स्थान, आंगनबाड़ी कार्यकत्री अथवा ईसीसीई एजुकेटर/प्री-प्राइमरी नोडल अध्यापक की उपलब्धता, बालमैत्री फर्नीचर, टीएलएम एवं प्रिंट-समृद्ध वातावरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही ब्लॉक कॉर्नर, पुस्तक कॉर्नर, कला एवं क्राफ्ट कॉर्नर तथा परफॉर्मेंस/नाटक कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए आयु-उपयुक्त अभ्यास पुस्तिकाएं एवं कार्यपत्रक भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
‘चहक’, ‘कदम’ एवं ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री के माध्यम से बच्चों में प्रारंभिक भाषा, साक्षरता, संख्याज्ञान एवं रचनात्मक क्षमताओं का विकास किया जाएगा। बच्चों के लिए खेलने का स्थान, आउटडोर प्ले सामग्री, वंडर बॉक्स/जादुई पिटारा तथा बालमैत्री हैंडवॉश एवं शौचालय की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र/बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन तथा न्यूनतम 70 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विद्यालय, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता, सुपरवाइजर एवं संबंधित विभागों के मध्य समन्वय स्थापित किया जाएगा। जनपद स्तर पर ईसीसीई कोर ग्रुप का गठन कर पूर्व प्राथमिक शिक्षा से संबंधित गतिविधियों के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, संसाधनों की उपलब्धता एवं अनुश्रवण को प्रभावी बनाया जाएगा। कोर ग्रुप द्वारा विद्यालयों के समीप संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को विद्यालय परिसर में स्थानांतरित करने, बालवाटिकाओं को क्रियाशील बनाने तथा नामांकन एवं उपस्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रीमती उपासना रानी वर्मा द्वारा बताया गया कि जिला स्तर पर शिक्षा एवं बाल विकास विभाग के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए अभिभावकों एवं समुदाय को पूर्व प्राथमिक शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। शासन की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही गुणवत्तापूर्ण, आनंददायी एवं गतिविधि आधारित शिक्षा उपलब्ध कराकर उन्हें आगे की औपचारिक शिक्षा के लिए मजबूत आधार प्रदान करना है।

