गाजीपुर। नदियों का जलस्तर घटने के साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोगों के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने जनस्वास्थ्य सुरक्षा अभियान तेज कर दिया है। पंचायती राज एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमें आपसी समन्वय से प्रभावित गांवों में लगातार एंटी लार्वा/लार्वी साइडल (टेमीफॉस) और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करा रही हैं।

बाढ़ के बाद जलभराव वाले स्थान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल हो जाते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया समेत अन्य संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाकर जलभराव वाले स्थानों, नालियों और मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों पर एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार ब्लीचिंग पाउडर का भी प्रयोग किया जा रहा है।

इन गांवों में चला विशेष छिड़काव अभियान

अभियान के तहत बाढ़ प्रभावित ताजपुर कुर्रा, चित्रकोनी, सिंहानी, अमौरा, देवल, सायर, बरेजी, कुतुवपुर, बारा, गहमर, खजुरी, पथरा, हरकरनपुर, दलपतपुर, रायसेनपुर तथा भदौरा के सुरही सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव कार्य कराया गया।

वहीं सैदपुर क्षेत्र के हथौड़ा, तेतारपुर और गौराहट में भी ब्लीचिंग पाउडर एवं लार्वी साइडल का छिड़काव कर मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई।

गांवों में जागरूकता पर भी जोर

जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि बाढ़ प्रभावित और जलभराव वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए तथा आवश्यकता के अनुसार नियमित रूप से निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों को साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल और मच्छरों से बचाव के उपायों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद घरों और आसपास जमा पानी को साफ करें तथा पीने के पानी को सुरक्षित रखें। बुखार, उल्टी-दस्त या अन्य संक्रामक रोगों के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

प्रशासन का स्पष्ट जोर है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समय रहते नियंत्रित किया जाए। इसके लिए पंचायती राज एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमें मैदानी स्तर पर लगातार सक्रिय हैं और संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई जारी है।