गाजीपुर। शहर की सड़कों की बदहाली कोई नई कहानी नहीं है। टूटी सड़कें, उखड़ी गिट्टियां, गड्ढों में भरा पानी और जगह-जगह निर्माण की आस में यह सब गाजीपुर की शहरी तस्वीर का लंबे समय से हिस्सा रहा है। आम नागरिक इन सड़कों पर चलने को मजबूर हैं और वर्षों से सड़क सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन अब अचानक इन जर्जर सड़कों पर ‘मरहम-पट्टी’ का काम शुरू हुआ है। सवाल यह नहीं है कि सड़कें क्यों बनाई जा रही हैं, सवाल यह है कि अब क्यों बनाई जा रही हैं और किस प्राथमिकता के आधार पर?

हालात ऐसे हैं कि शहर की कई सड़कों पर आम आदमी को हर दिन गड्ढों से जूझना पड़ता है। बरसात आती है तो गड्ढे पानी में छिप जाते हैं और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में धूल उड़ती है और बारिश में कीचड़ रास्ता रोकता है। वर्षों से नागरिकों की शिकायतें और जनप्रतिनिधियों की मांगें सामने आती रही हैं, लेकिन सड़कों की हालत में अपेक्षित बदलाव देखने को नहीं मिला।

फिलहाल सड़क मरम्मत का काम शुरू हुआ है तो इसे लेकर शहर में चर्चा भी तेज हो गई है। जिला अधिकारी के आवास से लेकर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तक सड़क को चमकाने का काम तेजी से होता दिखाई दिया है। जिस सड़क पर कुछ समय पहले तक बदहाली नजर आती थी, वहां अब मरम्मत और सुधार का काम नजर आ रहा है।

यह देखकर आम नागरिकों के मन में एक सीधा सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या किसी वीआईपी या अधिकारी के आवागमन वाले मार्ग की सड़क ही सबसे पहले ठीक होना जरूरी है?

अगर सड़कें वास्तव में खराब थीं और उनकी मरम्मत जरूरी थी तो फिर शहर के दूसरे हिस्सों की सड़कें वर्षों से क्यों उपेक्षित रहीं? क्या आम जनता की परेशानी उस समय दिखाई नहीं दे रही थी? क्या गड्ढों में गिरते दोपहिया वाहन, जाम में फंसते लोग और बारिश के पानी में डूबी सड़कें जिम्मेदारों की नजर से ओझल थीं?

विडंबना यह भी है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए कभी बरसात, कभी महंगाई, कभी निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमत और कभी ठेकेदारों की परेशानी जैसे तर्क सामने आते रहे हैं। वैश्विक परिस्थितियां भी विकास कार्यों की रफ्तार पर असर डालती हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर समस्या का बोझ अंततः आम जनता की पीठ पर ही डाला जाएगा?

ईरान युद्ध हो, निर्माण सामग्री की कीमत बढ़े या ठेकेदारों के सामने आर्थिक चुनौती हो, इन सभी परिस्थितियों का असर विकास कार्यों पर पड़ सकता है। मगर नागरिकों का सवाल बिल्कुल साफ है कि जब अधिकारी या वीआईपी के मार्ग को प्राथमिकता देकर सड़क को कुछ ही समय में दुरुस्त किया जा सकता है तो शहर की अन्य सड़कों के लिए वर्षों तक इंतजार क्यों?

गाजीपुर की जनता विकास विरोधी नहीं है। जनता तो चाहती है कि शहर की सड़कें अच्छी हों, नालियां साफ हों, जलभराव की समस्या दूर हो और आवागमन सुगम बने। लेकिन विकास की प्राथमिकता ऐसी होनी चाहिए जिसमें अधिकारी के आवास से लेकर आम नागरिक के मोहल्ले तक हर सड़क को समान नजर से देखा जाए।

जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह सवाल महत्वपूर्ण है। जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनती है ताकि उनकी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचे। ऐसे में यह देखना जरूरी होगा कि वे सिर्फ वीआईपी मार्गों की चमक देखकर संतुष्ट होते हैं या शहर की उन गलियों और सड़कों की आवाज भी उठाते हैं जहां नागरिक वर्षों से परेशान हैं।

फिलहाल सड़क पर मरहम-पट्टी शुरू हो चुकी है। उम्मीद है कि यह मरहम सिर्फ चुनिंदा रास्तों तक सीमित नहीं रहेगा और गाजीपुर के दूसरे जर्जर मार्गों तक भी पहुंचेगा। क्योंकि विकास की असली परीक्षा चमचमाती सड़क नहीं, बल्कि वह सड़क है जिस पर आम आदमी बिना डर और परेशानी के चल सके।

गाजीपुर में विकास की राह अभी प्रगति पर है। राह आसान नहीं है, यह बात जनता भी समझती है। लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि विकास की इस राह पर VIP के लिए चमकती सड़क और आम आदमी के लिए गड्ढों से भरी सड़क  कब तक रहेगी?