गाजीपुर। महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित, स्वावलंबी और जागरूक बनाने की दिशा में गाजीपुर पुलिस ने मिशन शक्ति के तहत एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। पुलिस अधीक्षक गाजीपुर के निर्देशन में जिले के सभी थानों में सितंबर माह के दौरान ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए थानावार और तिथिवार विस्तृत रोस्टर जारी किया गया है।

इन सम्मेलनों का उद्देश्य सिर्फ जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि महिलाओं की समस्याओं को उनके बीच जाकर सुनना और समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है। ग्रामीण महिलाओं से सीधे संवाद कर अवसाद, पारिवारिक तनाव और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों को रोकने के प्रयास किए जाएंगे। वहीं दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाओं के खिलाफ महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाएगी।

सम्मेलन की सबसे खास बात यह होगी कि कार्यक्रम का संचालन पूरी तरह महिला पुलिसकर्मियों द्वारा किया जाएगा। किसी पुरुष पुलिसकर्मी की भागीदारी नहीं होगी, ताकि महिलाएं बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें।

कार्यक्रम में आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, एएनएम और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी शामिल होंगी।

महिला पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे महिलाओं की समस्याओं को धैर्य, संवेदनशीलता और पूरी गोपनीयता के साथ सुनें। प्रत्येक सम्मेलन कम से कम एक घंटे का होगा, ताकि महिलाएं बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।

सम्मेलन में महिलाओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता, कानूनी अधिकार, साइबर अपराध से बचाव और विभिन्न महिला हेल्पलाइन के संबंध में जानकारी दी जाएगी। युवतियों और छात्राओं से संवाद कर उन्हें भावनात्मक दबाव या जल्दबाजी में लिए गए जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों के संभावित खतरों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।

कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए ग्राम प्रधान के सहयोग से स्थानीय लोकगीत एवं लोक संगीत का आयोजन भी किया जा सकेगा।

रोस्टर के अनुसार जिन थाना क्षेत्रों में 25 या उससे कम ग्राम सभाएं हैं, वहां प्रत्येक सप्ताह रविवार को एक ग्राम सभा में सम्मेलन होगा। वहीं 25 से अधिक ग्राम सभाओं वाले थाना क्षेत्रों में प्रत्येक रविवार दो ग्राम सभाओं में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए ग्राम सभा के चौकीदारों के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी कराया जा रहा है।

गाजीपुर पुलिस इस अभियान के परिणामों का मूल्यांकन केवल कार्यक्रमों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव से करेगी। पारिवारिक विवादों के त्वरित निस्तारण, छेड़खानी की घटनाओं में कमी और महिला शिकायतों पर प्रभावी पुलिस कार्रवाई जैसे मानकों के आधार पर अभियान की सफलता का मूल्यांकन जनपद एवं जोन स्तर पर किया जाएगा।

गाजीपुर पुलिस की यह पहल गांव की चौपाल से महिलाओं की आवाज को पुलिस तक पहुंचाने और उन्हें सुरक्षा, सम्मान व अधिकारों के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक प्रभावी कदम मानी जा रही है।