गाजीपुर। गंगा नदी के जलस्तर में फिलहाल कमी दर्ज की गई है, लेकिन आने वाले समय में जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उपजिलाधिकारी सेवराई-गाजीपुर गजराज सिंह यादव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य, पशु सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।
मच्छरजनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए प्रभावित ग्रामों में एंटी लार्वा दवा, कीटनाशक और आवश्यकता के अनुसार ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। साथ ही, गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुओं की सुरक्षा पर भी प्रशासन की नजर
रेवतीपुर क्षेत्र के हसनपुरा, विरउपुर और नसीरपुर गांवों में पशुओं का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण कराया जा चुका है। प्रभावित परिवारों के पशुओं के लिए भूसे का वितरण भी किया गया है, जिससे बाढ़ की स्थिति में पशुधन को चारे की समस्या न हो।
घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं
संचारी रोगों से बचाव के लिए जन चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। आशा बहुओं द्वारा घर-घर जाकर जरूरतमंद लोगों को आवश्यक दवाएं वितरित की जा रही हैं। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को बाढ़ प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप लगाने और बाढ़ के दौरान आकस्मिक चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतीपुर और भदौरा में पर्याप्त मात्रा में एंटी वेनम उपलब्ध है, ताकि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
सफाई व्यवस्था पर भी जोर
गांवों में साफ-सफाई को लेकर बीडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं और जमीनी स्तर पर कार्रवाई भी की जा रही है।
प्रशासन का संदेश साफ है—गंगा का पानी भले ही फिलहाल घट रहा हो, लेकिन संभावित बढ़ोतरी को लेकर तैयारियों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर पशुओं के टीकाकरण, चारे की व्यवस्था और स्वच्छता तक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने निगरानी और राहत व्यवस्था को सक्रिय रखा है।

