गाज़ीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में 'चेतना-प्रवाह' कार्यक्रम के अन्तर्गत उत्थान फाउण्डेशन ट्रस्ट वयपुर के सभागार में पुस्तक लोकार्पण एवं कवि-सम्मेलन सम्पन्न हुआ।युवा कवि हिमांशु भारद्वाज 'आनन्द' के काव्य-संग्रह 'कारवाँ-ए-अनहद ' के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता पी.जी.काॅलेज,गाजीपुर के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डाॅ.श्रीकांत पाण्डेय ने की।मुख्य अतिथि के रूप में जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा के कुलपति प्रो.हरिकेश सिंह एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में हिन्दीश्री साहित्य संस्थान, मीरजापुर के संस्थापक आनन्द अमित,टी.डी.काॅलेज,जौनपुर के डाॅ.जे.पी.सिंह,डॉ.पंकज कुमार गौतम व डाॅ.प्रशान्त त्रिवेदी उपस्थित थे।कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पार्चन से हुआ।उत्थान फाउण्डेशन ट्रस्ट के छात्रावास के बच्चों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

          साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर ने अतिथियों का वाचिक स्वागत किया।पुस्तक पर चर्चा करते हुए डाॅ.प्रशान्त त्रिवेदी ने कहा कि इस काव्य-संग्रह की कविताओं में युवा कवि के मन में चल रहे प्रेम,वियोग,आशा एवं संघर्ष की अभिव्यक्ति है।आनन्द अमित ने कहा कि यह पुस्तक प्रेम और आध्यात्म को समेटे हुए है।डाॅ.जे.पी.सिंह ने कहा कि इस काव्य-संग्रह में कवि के हृदय और मन का स्पन्दन है।डाॅ.पंकज कुमार गौतम ने कहा कि कवि की काव्य चेतना जागृत रहे जिससे लेखनी चलती रहे।प्रो.हरिकेश सिंह ने कहा कि इस संग्रह में संकलित कविताएँ कवि की विशिष्ट प्रतिभा को प्रमाणित कर रही हैं।डाॅ.श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि संग्रह की कविताओं को पढ़कर लगा कि कवि में सर्जना की अपार संभावनाएं हैं।लोकार्पण सत्र का संचालन संजीव गुप्त ने किया।

        द्वितीय सत्र में आयोजित कवि-सम्मेलन में कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को रससिक्त कर दिया।युवा शायर गोपाल गौरव ने 'कोई पूछे जरा यह क्या दीवाना लेकर आया है/वो अपने साथ अश्कों का खजाना लेकर आया है' सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।वरिष्ठ गीतकार-गजलकार कुमार नागेश ने 'वक्त गुजर जाता है,सारी उम्र ढल जाती है/मुट्ठी जितनी भी कसकर रखें,रेत फिसल जाती है' सुनाकर श्रोताओं को प्रभावित किया।ओज कवि दिनेश चन्द्र शर्मा ने 'लेगा जमाना खून के एक-एक बूंद का बदला/कातिल को कत्लेआम से थकने तो दीजिए' सुनाकर खूब तालियां बटोरी।वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी अमर ने 'मंगरू का बेटा आज भी बिन खाये सोता है/कपड़े के लिए रोता है' सुनाकर सोचने पर विवश किया।युवा व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने 'यह माइक,मंच और माला/न जाने क्या -क्या बना डाला' सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया।डाॅ.सन्तोष कुमार तिवारी ने 'बख्शो हमें मुहब्बतों की सल्तनत/और समझा दो उन मदांध शासकों को/कि शांत रहने पर ही/समुद्र विराट और खूबसूरत लगता है' सुनाकर आनन्दित किया।इसके अतिरिक्त डाॅ.शशांक शेखर पाण्डेय,मनोज यादव बेफ्रिक,संजय कुमार पाण्डेय,धर्मदेव सिंह यादव एवं समेर राम सरोज ने काव्य-पाठ किया।अध्यक्षता कुमार नागेश एवं संचालन डाॅ.संतोष कुमार तिवारी ने किया।

           कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी,सचिव हीरा राम गुप्ता,अम्बिका दूबे,डाॅ.संतोष सिंह,डॉ.समरेन्द्र नारायण मिश्र,डाॅ.पारसनाथ सिंह,विपिन बिहारी राय,डा.प्रेमशंकर सिंह,शैलेन्द्र तिवारी,वीरेन्द्र भारती,रामदरस राम,हिमांशु मिश्रा,मुकेश कुमार,अमित पाण्डेय,आशीष सिंह,रामराज आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।धन्यवाद ज्ञापन हिमांशु भारद्वाज 'आनन्द' ने किया।