गाजीपुर। शिक्षा के मंदिरों में छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन जनपद के अरशदपुर जंगीपुर स्थित आत्म प्रकाश महिला महाविद्यालय में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने विद्यालय की परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

मीडिया पड़ताल के दौरान विद्यालय की छात्राओं को लाने-ले जाने वाली बसों में अनेक अनियमितताएं देखने को मिलीं। प्राथमिक निरीक्षण में ऐसा प्रतीत हुआ कि कई आवश्यक सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। बसों में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) या तो उपलब्ध नहीं थे, अथवा दिखाई दी तो, उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं दिखी। कुछ उपकरणों पर अंकित विवरण स्पष्ट नहीं था बल्कि मिटा दिया गया था और उनकी वैधता को लेकर भी सवाल उठे।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन और परिवहन विभाग समय-समय पर 'ऑपरेशन सेफ फ्यूचर' जैसे अभियान चलाकर स्कूल वाहनों की जांच का दावा करते हैं, तब ऐसी कमियां आखिर कैसे बनी रहती हैं? यदि अभियान प्रभावी ढंग से लागू हो रहे हैं, तो फिर इन वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों दिखाई दे रही है?

मीडिया पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि विद्यालय प्रबंधन कई सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नहीं दिखा। इससे यह प्रश्न और गंभीर हो जाता है कि छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या केवल औपचारिक निरीक्षण कर संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, या फिर वास्तविक स्थिति की भी नियमित निगरानी की जाती है?

अब निगाहें संबंधित विभागों पर हैं। क्या परिवहन विभाग (आरटीओ) इस मामले में विस्तृत जांच करेगा? क्या शिक्षा विभाग, संबंधित विश्वविद्यालय अथवा जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा? यदि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाएंगे?


अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चियों की सुरक्षित यात्रा है। ऐसे में आवश्यकता है कि संबंधित अधिकारी विद्यालय की परिवहन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराएं, सभी स्कूल वाहनों का तकनीकी एवं सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और जो भी कमियां हों, उन्हें तत्काल दूर कराया जाए। सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हमारे मीडिया प्रतिनिधि ने एआरटीओ से संपर्क करने की कोशिश किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठ पाया। अब सवाल उठता है कि से फ्यूचर अभियान कहीं भ्रष्टाचार का भेंट तो नहीं चढ गया।