जमानियां। बिजली अधिकारियों के सह पर कर्मचारी बिना अवैध धनराशि वसूले मरम्मत का कार्य नहीं करते है। बताया जाता है। कि अगर रात्रि समय कस्बा बाजार की विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाती है। तो उसे मरम्मत करने के लिए 1000 से लेकर 500 रूपये की सरेआम कर्मचारी कर देते है। बिना अवैध धनराशि वसूल किए मरम्मत का कार्य नहीं करते है। बिजली उपभोक्ताओं द्वारा शिकायत करने पर कोई सुनवाई और ना ही कोई कार्यवाही किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के तहसील अध्यक्ष मोहम्मद इजहार खान, व्यापार मंडल के युवा जिला उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, वीरेंद्र कुमार, हाजी इमरान नियाजी, रामनिवास प्रसाद, राजू रतन सिंह यादव, हाजी तबस्सुम सिद्दीकी, वसीम राइन सहित आदि बिजली उपभोक्ताओं ने विभागीय अधिकारियों पर घूसखोरी का आरोप लगाते हुए। कहा कि विद्युत विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बेलगाम होने के साथ साथ अवैध कमाई करने के फिराक में 24 घंटा लगे रहते है। बिना धनराशि लिए मरम्मत का कार्य करने के लिए तैयार नहीं होते है। इनको भी सबक सिखाने के लिए जरूत पड़ने पर बिजलेश टीम का सहयोग लेना पड़ेगा। क्यों कि जरूरत पड़ने पर विभागीय अधिकारी भी फोन को रिसीव नहीं करते और ना ही कॉल का सही जवाब देते है। मुन्ना गुप्ता ने कहा कि बिजली कर्मचारी रात्रि समय लोकल फॉल्ट की मरम्मत करने के लिए अवैध धनराशि की मांग करने पर आमादा रहते है। मजबूर बिजली उपभोक्तागण धनराशि देने के लिए बाध्य हो जाते है। विद्युत विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर किसी का भी डर नहीं होता है। जबकि बिजली गुल होने पर कर्मचारियों के द्वारा पैसे मांगने की शिकायत के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के हेल्पलाइन नंबर 1912 पर तुरंत कॉल कर सूचना दिया जा सकता है। वसर्ते विभागीय स्तर पर कार्यवाही होने लगे। तो सारी समस्याओं का समाधान चंद घंटों में हो सकता है। उन्होंने बताया कि अवर अभियंता (JE), उपखंड अधिकारी (SDO) या अधिशासी अभियंता (XEN) को लिखित शिकायत करना व्यर्थ रहता है। विद्युत प्राइवेट कर्मी कही भी पहुंचकर अवैध कमाई करने के लालच में मीटर की वीडियो बनाना उपभोक्ताओं से उलझ जाने अपनी आदत में बेशुमार होते जा रहे है। उपभोक्ता के पास इनके इलाज के लिए बहुत सी दवाएं मौजूद रहता है। उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
मोहम्मद इजहार खान ने बताया कि यदि संभव हो, तो अवैध वसूली की मांग का ऑडियो या वीडियो प्रमाण सुरक्षित रखा जाए। ताकि उच्च अधिकारियों से सख्त कार्रवाई कराई जा सके।

