जमानियां। पीएचसी पर हर रविवार को लगने वाला मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। कार्यरत अधिकांश डाक्टर समय से अस्पताल ही नहीं पहुंचते हैं। किसी का ताला खुलता है तो किसी का नहीं। कुछ ताला खोलकर बैठे रहते हैं। जो शाम होते ही तांला बंद कर चले जाते हैं। कार्यरत चिकित्सक रजिस्टर में मरीजों की संख्या फर्जी तरीके से भर देते है। जिम्मेदार जानते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। बताया जाता है। कि हर रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया गया। जिसमें से आधे से अधिक अस्पतालों का तो ताला ही नहीं खुलता है।
जबकि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रुद्रकांत सिंह गायब रहे। से मजे की बात सीएमओ गाजीपुर ऐसे लापरवाह डाक्टरों में कार्यवाही तो क्या जांच करने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पाते है। जब की कस्बा बाजार स्थित पीएचसी की दुर्दशा और कार्यरत चिकित्सकों की गैर जिम्मेदाराना रवैए के बारे में बराबर खबर प्रकाशित होती है। लेकिन उसपर अंकुश लगाने के लिए सीएमओ गाजीपुर तैयार नहीं दिखते है। अस्पताल में मरीज आए ना आए उसका रजिस्टर में मरीजों के नाम जरूर लिख दिए जाते हैं। मरीजों के नाम भी फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराने पहुंचे त्रिलोकी नाथ निषाद, इरफान खान, तेतरी देवी, शकुंतला देवी, वसीम अंसारी, गोविद कुशवाहा, व्यापार मंडल के जिला युवा उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, अमन शांति एकता कमेटी के सर परस्त निसार खान वारसी, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार के तहसील अध्यक्ष मोहम्मद इजहार खान ने बताया कि बुखार का इलाज कराने आए थे। कार्यरत डाक्टर के इंतजार में काफी देर से बैठे रहे। ताला बंद देख लौटना पड़ा। जबकि डॉक्टर शमशेर बहादुर बिना बैनर के बैठे रहे।

