गाजीपुर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित रायफल क्लब सभागार में जिला श्रम बन्धु, जनपद स्तरीय बाल श्रम उन्मूलन समिति तथा बाल एवं बंधुआ श्रमिकों के रेस्क्यू, पुनर्वास एवं अनुश्रवण हेतु गठित जिला टास्क फोर्स की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में श्रमिकों के हितों के संरक्षण, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
सहायक श्रम आयुक्त ने बताया कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत जनपद में अब तक 2,40,878 निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है। श्रमिकों के पंजीकरण एवं योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए 117 विशेष शिविर लगाए गए तथा विकासखंडों में जनजागरूकता हेतु वाल पेंटिंग भी कराई गई।
बैठक में डॉ. भीमराव अम्बेडकर श्रमिक सुविधा केन्द्र (लेबर अड्डा) के लिए लगभग 2000 वर्गफीट भूमि के चयन/चिह्नांकन पर भी चर्चा हुई। यहां श्रमिकों को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित स्थान के साथ पेयजल, शौचालय और विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।
डीएम ने निर्माण कार्यदायी संस्थाओं, विभागों एवं स्थानीय निकायों को अपने निर्माण कार्यों का अधिष्ठान पंजीयन अनिवार्य रूप से कराने और नियमानुसार उपकर (सेस) समय से जमा करने के निर्देश दिए। साथ ही निर्माण स्थलों पर कार्यरत पात्र श्रमिकों का शत-प्रतिशत पंजीकरण कराने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा।
बाल श्रम उन्मूलन पर डीएम ने दिखाई सख्ती
बाल श्रम की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने चिन्हांकन, रेस्क्यू, पुनर्वास तथा बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गाजीपुर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से नियमित निरीक्षण एवं प्रभावी प्रवर्तन अभियान चलाएं।
बैठक में श्रमिकों के लिए संचालित मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, कन्या विवाह सहायता योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना तथा निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। डीएम ने पात्र श्रमिकों को समयबद्ध ढंग से लाभ दिलाने और अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों के आवेदन कराने के निर्देश दिए।
इसके अलावा नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, निर्माण कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी तथा श्रम विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

