गाजीपुर। कार्यालय महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ने वर्ष 2025-26 की Annual Closing के बाद कई जीवंत जीपीएफ खातों (Live GPF Accounts) में ऋणात्मक अवशेष प्रदर्शित होने पर गंभीरता दिखाई है। खातों की Annual Account Statement की समीक्षा में सामने आई इस स्थिति के बाद संबंधित विभागों को तत्काल परीक्षण और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

महालेखाकार कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि सामान्य भविष्य निधि नियमावली, 1985 के नियम 11(6) के अनुसार यदि किसी अभिदाता द्वारा उसके जीपीएफ खाते में जमा राशि से अधिक धनराशि आहरित कर ली जाती है, तो ऐसी अधिक आहरित धनराशि ब्याज सहित वापस की जानी अथवा नियमानुसार वसूल की जानी आवश्यक है।

निर्देश दिए गए हैं कि सूची में प्रदर्शित जीपीएफ खातों में ऋणात्मक अवशेष का तत्काल परीक्षण किया जाए और यह निर्धारित किया जाए कि यह स्थिति अधिक आहरण, Missing Subscription, Arrear, Transfer अथवा किसी लेखा विसंगति के कारण उत्पन्न हुई है। इसके बाद नियमानुसार वसूली, मिलान अथवा समायोजन की कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जाए।

साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि यदि किसी अभिदाता के खाते में पर्याप्त इतिशेष उपलब्ध नहीं था अथवा खाता पहले से ऋणात्मक था, तो ऐसी स्थिति में आहरण किस आधार पर स्वीकृत किया गया। इस संबंध में कारण स्पष्ट करते हुए वरिष्ठ लेखाधिकारी/डीबीए, कार्यालय महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), प्रयागराज को सूचना उपलब्ध कराने के साथ संबंधित अधिकारियों को भी अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

महालेखाकार कार्यालय की इस कार्रवाई से जीपीएफ खातों में होने वाली वित्तीय एवं लेखा संबंधी विसंगतियों की जांच तथा लंबित समायोजन प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।