कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से पढ़वाई किताबें, पूछे सवाल; शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर साफ-सफाई तक परखी व्यवस्था

गाजीपुर। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने विकास खंड सदर के कम्पोजिट विद्यालय बीकापुर एवं कम्पोजिट विद्यालय बबेड़ी का औचक स्थलीय निरीक्षण किया। CDO के अचानक विद्यालय पहुंचते ही विद्यालयी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत सामने आई।

बीकापुर में 205 में 131 बच्चे मिले उपस्थित

कम्पोजिट विद्यालय बीकापुर में कुल 205 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष 131 विद्यार्थी उपस्थित मिले, जबकि विद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित पाए गए। मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता का बारीकी से निरीक्षण किया।

उन्होंने विद्यालय में स्थापित एस्ट्रो लैब का भी अवलोकन किया। इसके बाद कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी शैक्षणिक क्षमता परखी। बच्चों से किताबें पढ़वाई गईं, जिस पर विद्यार्थियों ने संतोषजनक प्रदर्शन किया। बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए CDO ने उन्हें चॉकलेट एवं टॉफियां वितरित कीं।

बबेड़ी में जलभराव ने खोली व्यवस्था की पोल

इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी कम्पोजिट विद्यालय बबेड़ी पहुंचे। यहां 225 नामांकित बच्चों के सापेक्ष 140 विद्यार्थी उपस्थित मिले। निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर में पानी जमा पाया गया। इस पर CDO ने नाराजगी जताते हुए जलभराव तत्काल साफ कराने के निर्देश प्रधानाध्यापक को दिए।

कक्षा 1, 2, 7 और 8 के विद्यार्थियों से विभिन्न विषयों से जुड़े सवाल पूछकर उनके ज्ञान का आकलन किया गया। बच्चों ने पूछे गए प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए। निरीक्षण के दौरान बच्चों के बीच चॉकलेट का वितरण भी किया गया।

“निपुण लक्ष्य की प्राप्ति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता”

मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ निपुण लक्ष्यों की प्राप्ति, आधारभूत साक्षरता, संख्या ज्ञान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष फोकस किया जाए।

उन्होंने विद्यालयों में आवश्यक सुधारों को लेकर संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी, सदर समेत संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

CDO के इस औचक निरीक्षण से यह साफ संदेश गया कि सरकारी स्कूलों में केवल उपस्थिति ही नहीं, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता, स्वच्छ वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता है।