गाजीपुर में डूबने की घटनाओं पर प्रशासन सख्त, 15 दिन में घाटों पर सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश

गाजीपुर। जिले में नदी, तालाब और अन्य जलाशयों में डूबने से लगातार हो रही जनहानि को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। वर्षा ऋतु और आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान घाटों एवं जलाशयों पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और बचाव व्यवस्था को लेकर व्यापक कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) एवं खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को निर्देशित किया है कि जनपद के सभी संवेदनशील एवं दुर्घटना बाहुल्य घाटों और जलाशयों को चिन्हित कर अगले 15 दिनों के भीतर चेन बैरियर, फ्लोटिंग बैरियर अथवा अन्य उपयुक्त सुरक्षा अवरोध हर हाल में स्थापित किए जाएं। इसके लिए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर निकायों तथा आपदा राहत कोष से नियमानुसार धनराशि का उपयोग किया जा सकेगा।

गंगा के 95 किमी प्रवाह क्षेत्र पर विशेष नजर

गाजीपुर में गंगा नदी की करीब 95 किलोमीटर लंबी धारा के साथ हजारों तालाब एवं अन्य जलाशय हैं। प्रशासन ने ऐसे सभी स्थलों पर विशेष निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है, जहां डूबने की घटनाएं पहले हो चुकी हैं या दुर्घटना की आशंका अधिक है।

प्रमुख घाटों पर पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक तहसील में गोताखोरों के नाम, मोबाइल नंबर और उपलब्धता का विवरण तैयार रखा जाएगा, ताकि आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके।

लाल बोर्ड बताएंगे—‘यहां खतरा है’

दुर्घटना बाहुल्य घाटों और तालाबों के किनारे बड़े एवं स्पष्ट लाल रंग के चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। इन पर “दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र” और “पानी में अधिक गहराई तक जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है” जैसी चेतावनियां प्रमुखता से अंकित होंगी।

मौत पर तीन दिन में राहत, परिवार को नहीं लगाने होंगे चक्कर

प्रशासन ने डूबने से होने वाली प्रत्येक जनहानि के मामले में मृतक के परिजनों को नियमानुसार आपदा राहत कोष से अनुमन्य आर्थिक सहायता/क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया घटना के तीन दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट किया गया है कि पात्र परिवारों को सहायता के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

एनसीसी, एनएसएस और स्वयंसेवकों की भी होगी भूमिका

सिविल डिफेन्स, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड सहित स्वयंसेवी संगठनों के सदस्यों से समन्वय कर तहसीलवार रोस्टर तैयार किया जाएगा। इनके माध्यम से घाटों और जलाशयों पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

लोगों को गहरे पानी में न जाने, बच्चों को अकेले जलाशयों के पास न जाने देने और अन्य जरूरी सावधानियों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

पुलिस गश्त और 112 की मूवमेंट भी होगी प्रभावी

संवेदनशील घाटों एवं जलाशयों पर स्थानीय पुलिस और चौकी प्रभारियों की नियमित गश्त सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 112 वाहनों की प्रभावी मूवमेंट पर भी जोर दिया गया है। भीड़ वाले आयोजनों में अतिरिक्त पुलिस बल और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।

विशेष रूप से गंगा दशहरा, छठ पर्व और जीवित्पुत्रिका तीज जैसे अवसरों पर संभावित भीड़ को देखते हुए बैरियर, चेतावनी बोर्ड, गोताखोर, पुलिस बल, प्रकाश व्यवस्था सहित सभी आवश्यक प्रबंध पहले से पूरे करने को कहा गया है।

एसडीएम होंगे सीधे जिम्मेदार

निर्देशों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक तहसील में संवेदनशील स्थलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। एसडीएम स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का सत्यापन करेंगे।

यदि निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही या अव्यवस्था के कारण किसी तहसील क्षेत्र में डूबने से जनहानि होती है, तो संबंधित एसडीएम की जिम्मेदारी तय की जाएगी। घटना के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर भी उनके उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्थलीय निरीक्षण कर कमियों का तत्काल निराकरण कराएं और निर्धारित समयावधि में तहसीलवार अनुपालन आख्या उपलब्ध कराएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाए। आगामी पर्वों से पहले घाटों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के प्रशासन के इस फैसले से हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाने की उम्मीद है।