जमानियां। ईद उल अजहा यानि बकरीद का पर्व शांतिपूर्ण और आपसी चारा के साथ संपन्न हुई। बताया जा रहा है। कि ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व इस्लाम धर्म का बेहद पवित्र और खास त्योहार माना जाता है। नूरी मस्जिद एवं ईदगाह के पेशे इमाम असरफ करीम कादरी के अनुसार ईद-उल-अजहा की शुरुआत पैगंबर हजरत इब्राहिम की महान कुर्बानी से जुड़ी है। अल्लाह के हुक्म पर उन्होंने अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला किया। लेकिन अल्लाह ने उनकी परीक्षा पूरी होने पर इस्माइल की जगह एक बकरे को कुर्बानी के लिए भेज दिया। इसी घटना की याद में मुसलमान ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी अदा करते हैं। यह पर्व केवल कुर्बानी तक सीमित नहीं है। बल्कि त्याग, समर्पण, इंसानियत और अल्लाह के प्रति सच्ची आस्था का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में रमजान के पाक महीने के बाद आने वाला ईद-उल-अजहा, जिसे इब्राहिम की सुन्नत ईद उल अजहा यानि बकरीद कहा जाता है। यह पर्व बेहद खास और पवित्र त्योहार माना गया है। यह पर्व केवल कुर्बानी तक सीमित नहीं है। बल्कि त्याग, समर्पण, इंसानियत और अल्लाह के प्रति आस्था का संदेश देता है। शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह त्योहार हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इस दिन लोग नमाज अदा कर अमन और खुशहाली की दुआ मांगते हैं। तथा जरूरतमंदों की मदद भी करते हैं। हर साल की तरह इस बार भी यह त्योहार 28 मई को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। शाही जामा मस्जिद के इमाम तौहीद रजा के अनुसार हजरत इब्राहिम को लगातार तीन दिनों तक ख्वाब में अपने बेटे की कुर्बानी देने का इशारा मिला था। यह उनके लिए बेहद कठिन परीक्षा थी। क्योंकि एक तरफ बेटे से गहरा प्यार था। तो दूसरी तरफ अल्लाह का हुक्म जब हजरत इब्राहिम ने यह बात अपने बेटे हजरत इस्माइल को बताई।तो उन्होंने भी बिना किसी हिचकिचाहट के अल्लाह के आदेश को स्वीकार कर लिया। और पिता और पुत्र की यह आज्ञाकारिता, त्याग और ईमानदारी इस्लाम में मिसाल मानी जाती है। इस दौरान सुरक्षा की पुख्ता इंतजाम को लेकर उपजिलाधिकारी मनोज कुमार पाठक, क्षेत्राधिकारी अनिल कुमार, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राम सजन नागर, तहसीलदार राम नारायण वर्मा, नायब तहसीलदार जितेंद्र कुमार राजस्व टीम एवं पुलिस बल के साथ मुस्लिम ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान पर्व को शांति पूर्ण संपन्न होने पर राहत की सांस लिया।