नवाचार, शोध और उद्यमिता से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प: प्रो. आनंद कुमार त्यागी


वाराणसी *(भाप्रेसे/बीबीसी - इंडिया/विश्ववाणी समाचार)* ।हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को प्रथम दीक्षांत समारोह का गरिमामय एवं ऐतिहासिक आयोजन सम्पन्न  हुआ ।

             यह समारोह महाविद्यालय के शैक्षणिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है जिसमें सत्र 2022-23 के उत्तीर्ण कुल 728 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं जिसमें 587 स्नातक स्तर पर बीए, बीकॉम, बीएससी, बीएड व एलएलबी के तथा 141 स्नातकोत्तर स्तर पर 12 विषयों के विद्यार्थी शामिल रहे, उपाधि प्राप्त करते विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास, गर्व और भविष्य के प्रति उत्साह स्पष्ट झलक दिखाई दे रहा था।

       कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो.आनंद कुमार त्यागी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में काशी विद्यापीठ की कुलसचिव डॉ.सुनीता पांडेय थी। दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षकों, अभिभावकों, शोधार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।

         दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ होता है, जहां से वे केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा आरंभ करते हैं। 

          उन्होंने काशी की बौद्धिक परंपरा को स्मरण करते हुए कहा कि यह भूमि केवल शिक्षा की नहीं, बल्कि विचार और नवजागरण की भी रही है।                  

             प्रो. त्यागी ने भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतेंदु बाबू ने आधुनिक हिंदी साहित्य के माध्यम से समाज को चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान को स्वर प्रदान किया और विद्यार्थियों को भी उसी परंपरा से प्रेरणा साथ ज्ञान को समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना चाहिए।           

            उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी जब युवा वर्ग नवाचार, उद्यमिता, शोध और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ेगा। शिक्षा को केवल रोजगार तक सीमित न रखते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक परिवर्तन पहुंचाने का माध्यम बनाना होगा।

            विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि आत्ममंथन और आत्मदायित्व का अवसर है और विद्यार्थी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में खड़ा हैं, जहां ज्ञान के साथ–साथ संवेदनशीलता, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व भी अत्यंत आवश्यक हैं।

           उन्होंने कहा कि भारतेंदु युग की चेतना आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि साहित्य, भाषा और शिक्षा समाज को दिशा देने की शक्ति रखते हैं। 

           अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रजनीश कुंवर तथा प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश* द्वारा अंगवस्त्र एवं स्मृति–चिह्न भेंट कर किया गया तथा इस मौके पर महाविद्यालय की पत्रिका "ज्योतिष्मती" का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स ने एनसीसी कमांडर डॉ राम आशीष के नेतृत्व में मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ़ ऑनर भी दिया।

          कार्यक्रम का संचालन प्रो. ऋचा सिंह एवं प्रो. ममता वर्मा ने संयुक्त रूप से किया,धन्यवाद ज्ञापन प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, समस्त शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

              इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।