इंग्लिश मीडियम स्कूलों में आरटीई के तहत बच्चों का एडमिशन शुरू
गाज़ीपुर। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इंग्लिश मीडियम स्कूलों में बच्चों का दाख़िला शुरू हो गया है। इस पहल से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित, अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। एडमिशन प्रक्रिया शुरू होते ही अभिभावकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
आरटीई अधिनियम 2009 के अंतर्गत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 या प्री-प्राइमरी स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की जाती हैं। इसी प्रावधान के तहत इस बार भी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
आरटीई यानी Right to Education Act, 2009 भारत सरकार द्वारा लागू किया गया वह कानून है, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा केवल गरीबी, सामाजिक स्थिति या संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों को यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने यहां 25% सीटें समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखें, जिनकी फीस का भुगतान सरकार करती है।
इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ने का सपना होगा पूरा
अब तक इंग्लिश मीडियम स्कूलों की पढ़ाई आमतौर पर मध्यम और उच्च वर्ग तक ही सीमित मानी जाती थी, लेकिन आरटीई कानून ने इस सोच को बदल दिया है। इस योजना के तहत अब मजदूर, रिक्शा चालक, छोटे किसान, घरेलू कामगार, मुसहर, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे भी बड़े और प्रतिष्ठित इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाई कर सकेंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा और वे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
ऑनलाइन प्रक्रिया से हो रहा आवेदन
आरटीई एडमिशन के लिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। अभिभावक शिक्षा विभाग की अधिकृत वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए चरणबद्ध निर्देश भी जारी किए गए हैं।
आवेदन के दौरान निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र
आधार कार्ड
आय प्रमाण पत्र
जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
निवास प्रमाण पत्र
पासपोर्ट साइज फोटो
शिक्षा विभाग का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के बाद लॉटरी सिस्टम के माध्यम से बच्चों का चयन किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
लॉटरी सिस्टम से होगा चयन
आरटीई एडमिशन प्रक्रिया में किसी प्रकार का भेदभाव न हो, इसके लिए सरकार ने कंप्यूटराइज्ड लॉटरी सिस्टम अपनाया है। आवेदन की अंतिम तिथि के बाद स्कूलवार और क्षेत्रवार लॉटरी निकाली जाएगी।
लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष होगी, जिसकी निगरानी शिक्षा विभाग के अधिकारी करेंगे। चयनित बच्चों की सूची वेबसाइट पर जारी की जाएगी और अभिभावकों को मोबाइल संदेश के माध्यम से भी सूचना दी जाएगी।
अभिभावकों में खुशी, उम्मीदें बढ़ीं
आरटीई के तहत इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन शुरू होने से अभिभावकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति आड़े आ रही थी।
एक अभिभावक ने कहा, “हम मजदूरी करते हैं। इंग्लिश मीडियम स्कूल की फीस देना हमारे बस की बात नहीं थी। आरटीई की वजह से अब हमारे बच्चे भी बड़े स्कूल में पढ़ पाएंगे।”
वहीं एक अन्य महिला ने कहा, “सरकार की यह योजना गरीब बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। हमें उम्मीद है कि हमारे बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे।”
शिक्षा अधिकारियों की अपील
जिला शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे समय रहते आवेदन करें और किसी भी दलाल या बिचौलिए के चक्कर में न पड़ें। आरटीई एडमिशन पूरी तरह निशुल्क प्रक्रिया है और इसके लिए किसी को भी पैसा देने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अभिभावक को आवेदन में समस्या आती है तो वे ब्लॉक शिक्षा कार्यालय या जिला शिक्षा कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
सामाजिक संगठनों की सराहना
आरटीई के तहत इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन शुरू होने पर सामाजिक संगठन मानव उदय फाउंडेशन गाज़ीपुर और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि यह योजना शिक्षा के अधिकार की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इस योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए तो आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
हालांकि आरटीई योजना सराहनीय है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। कई जगहों पर जागरूकता की कमी के कारण पात्र परिवार आवेदन नहीं कर पाते। वहीं कुछ स्कूलों पर आरटीई सीटों को लेकर अनियमितता के आरोप भी लगते रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को जागरूकता अभियान तेज करना चाहिए और स्कूलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए, ताकि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
आरटीई के तहत इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन शुरू होना न केवल बच्चों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे शिक्षा में समानता आएगी और सामाजिक खाई धीरे-धीरे कम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब गरीब और अमीर वर्ग के बच्चे एक ही स्कूल और एक ही कक्षा में पढ़ेंगे, तो समाज में समरसता और बराबरी की भावना मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, इंग्लिश मीडियम स्कूलों में आरटीई के तहत बच्चों का एडमिशन शुरू होना शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यह योजना उन बच्चों के सपनों को पंख दे रही है, जो अब तक संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते थे।
यदि सरकार, स्कूल प्रबंधन और समाज मिलकर इस योजना को ईमानदारी से लागू करें, तो निश्चित रूप से आने वाला भविष्य शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखेगा।



