तहसीलदार की मेहरबानी में कंप्यूटर ऑपरेटर की मनमानी, आम जनता त्रस्त
गाजीपुर। जनपद गाजीपुर के सदर ब्लॉक अंतर्गत तहसील कार्यालय में इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही और कर्मचारियों की मनमानी को लेकर आम जनता में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। तहसील कार्यालय, जिसे जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का केंद्र होना चाहिए, वही कार्यालय आज लोगों के लिए परेशानी और मानसिक पीड़ा का कारण बनता जा रहा है। खास तौर पर खतौनी, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य राजस्व कार्यों के लिए आने वाले ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर आरोप तहसील कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर पर लग रहे हैं, जिनकी कार्यशैली को लेकर लोगों में भारी नाराज़गी है। निर्धारित समय सुबह 10:00 बजे कार्यालय खुलने का है, लेकिन आरोप है कि संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर अक्सर 10:30 बजे या उससे भी बाद कार्यालय पहुंचता है। इस देरी के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
तहसील परिसर में सुबह से ही दूर-दराज के गांवों से आए किसान, मजदूर, बुजुर्ग, महिलाएं और छात्र-छात्राएं अपनी-अपनी समस्याओं के समाधान की आस में खड़े नजर आते हैं। कोई जमीन की खतौनी निकलवाने आया है, तो कोई विरासत से जुड़ा मामला लेकर। कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेजों की सख्त आवश्यकता होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने रोज़गार और खेत-खलिहान का काम छोड़कर तहसील आते हैं, लेकिन यहां पहुंचने के बाद उन्हें पता चलता है कि संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर अभी तक कार्यालय नहीं आया है।
तहसील कार्यालय में मौजूद लोगों ने खुलकर अपनी नाराज़गी जाहिर की। एक बुजुर्ग किसान ने कहा, “हम सुबह 8 बजे घर से चलकर यहां आते हैं। 10 बजे दफ्तर खुलता है, लेकिन कंप्यूटर बाबू 10:30–11 बजे आते हैं। पूछने पर कोई जवाब नहीं मिलता। आखिर हम कहां जाएं?”
वहीं एक महिला ने बताया कि तीन दिन से तहसील के चक्कर काटने के बावजूद काम नहीं हो पाया। “हर दिन यही कहा जाता है—आज नहीं, कल आना,” महिला ने आक्रोश भरे स्वर में कहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब कुछ तहसीलदार की जानकारी में होने के बावजूद चल रहा है। जनता का मानना है कि अगर जिम्मेदार अधिकारी सख्ती दिखाएं, तो कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम लग सकती है। लेकिन मौजूदा हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि तहसीलदार की “मेहरबानी” से ही कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी मनमानी कर रहा है।
लोगों का कहना है कि न तो समय से उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई हो रही है। इससे यह संदेश जा रहा है कि कार्यालय में अनुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है।

