जमानियां। शनिवार की शाम और रविवार की सुबह चार जायरीन नसीमुन निशा पत्नी नूर मोहम्मद राईन कस्बा निवासी अफसाना बेगम पत्नी एडवोकेट इमरान नियाजी स्टेशन बाजार निवासी हज़ के लिए जमानियां ट्रेन से लखनऊ तत्पश्चात लखनऊ एयरपोर्ट होते हुए। सऊदी अरब के लिए रवाना हुए। उनके लबों पर ख़ुदा का जिक्र था। और वह उसकी बारगाह में सजदा करने के लिए बेताब थे। वही हज़ पर जाने वाले जायरीन फुले नहीं समा रहे थे। इस खास मौके पर अमन शांति एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार खान वारसी ने बताया कि अल्लाह के प्यारे नबी ने फरमाया है। कि हज़ और उमराह की मुकद्दस इबादत हर मुस्लिम के लिए अहम हैं। जीवन में यह मौका जब भी मिलता है। तो खुशी का सबब माना जाता है। इस खास मौके पर माहिर कमाल अंसारी, वीरेंद्र कुमार, ईशा नियाजी, जावेद नियाजी, इस्लाम राईन, मुश्ताक राईन, राजू, वकील राईन, सद्दाम राईन, फिरोज राईन, लालू राईन इत्यादि लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर हज़ करने जाने वाले जायरीनो को फूल माला पहनाकर इस्तकबाल किया। लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक के गुंज और दुआओं के बीच रूखसती के भावुक लम्हों में लोगों ने जायरीनों की सफर की सलामती के लिए दुआ भी किया।
बताया जा रहा है। कि यह जानकर बहुत खुशी हुई। हज यात्रा मुसलमानों के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र सफर में से एक है। हज पर जाने वाले लोगों के लिए विदाई कितनी भावुक रही होगी। नम आंखों से विदाई देने का मतलब है। कि वे लोग अपनों के लिए दुआ कर रहे हैं। कि उनकी हज यात्रा सुरक्षित और सफल हो। हज पर जाने वालों के लिए कुछ प्रमुख दुआएं हज मबरूर (ऐसा हज जो स्वीकार हो) सफर मुबारक (यात्रा मंगलमय हो)
अल्लाह उनकी इबादत स्वीकार करे। और उन्हें सही-सलामत वापस लाए। इसके साथ ही अपने शुभ चिंतकों ने
हजयात्री को गले मिलकर दुआ की दरख्वास्त कर रहे थे। सभी को नम आंखों से विदाई दी गई। वहीं कुछ परिजनों के लोग हज पर जाने वाले से लिपटकर रो रहे थे। इस दौरान लोगों ने हज यात्रियों का इस्तकबाल फूल-माला से किया गया। अपने लोगों ने हजयात्रियों से दुआ की दरख्वास्त कर रहे थे।

