गाजीपुर। विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस 28 मई 2026 के अवसर पर ग्रामीण विकास संस्थान, गाजीपुर द्वारा मंगलवार को महुआबाग स्थित होटल कम्फर्ट इन शुभ्रा में “हमारी बेटियां, हमारा गौरव” अभियान के अंतर्गत विशेष संवाद कार्यक्रम एवं प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य माहवारी (पीरियड्स) को लेकर समाज में फैली झिझक, चुप्पी और भेदभाव को समाप्त कर इसे सामान्य जैविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करने की सोच को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम में किशोर-किशोरियों, युवा लीडरों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया। संस्था की ओर से बताया गया कि “जागृति फेलोशिप” के तहत जनपद के पांच ब्लॉकों में 53 फेलो कार्य कर रहे हैं, जबकि “सौहार्द कार्यक्रम” के अंतर्गत छह जिलों में 60 फेलो किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता पर कार्यरत हैं।

संवाद कार्यक्रम में माहवारी स्वच्छता, पोषण, व्यक्तिगत साफ-सफाई, पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याएं, सामाजिक मिथक और महिलाओं के प्रति भेदभाव जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में शामिल किशोरियों एवं युवा लीडरों ने खुलकर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज भी कई जगहों पर माहवारी को लेकर संकोच और भेदभाव की स्थिति बनी हुई है।


प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब किशोरी लीडर नीतू, अंजली, उम्मे साहिबा, पूजा, पूजा राजभर, चन्दन एवं प्रिंस ने अपने अनुभवों के माध्यम से दिया। प्रतिभागियों ने कहा कि माहवारी के दौरान किशोरियों और महिलाओं को परिवार एवं समाज से सहयोग और सम्मान मिलना चाहिए।

विशेष अतिथि के रूप में मौजूद महिला चिकित्सक डॉ. नम्रता श्रीवास्तव ने कहा कि “माहवारी अभिशाप नहीं बल्कि प्रकृति का वरदान है। यह महिलाओं की पहचान और स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया है, इससे डरने या शर्माने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द, स्वच्छता और सही खानपान पर विस्तृत जानकारी दी।


उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लड़कियों में कम उम्र में पीरियड शुरू होने के पीछे बदलती जीवनशैली और जंक फूड प्रमुख कारण हैं। पिज्जा, बर्गर, नूडल्स और मैगी जैसे खाद्य पदार्थ हार्मोनल बदलाव को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे मोटापा, चेहरे पर पिंपल्स और अन्य समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे बचाव के लिए नियमित व्यायाम और शारीरिक श्रम जरूरी है।

कार्यक्रम में महर्षि विश्वामित्र ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज गाजीपुर की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. प्रीति पाल ने माहवारी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साफ-सफाई में लापरवाही से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने गर्भाशय कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि 9 से 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए यह टीका बेहद उपयोगी है।


किशोरियों द्वारा पीरियड्स अनियमित होने से जुड़े सवाल पूछे गए, जिस पर विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक तनाव, खानपान और दिनचर्या में अनियमितता इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि 20 से 35 दिन के बीच मासिक चक्र सामान्य माना जाता है और तनाव मुक्त जीवनशैली अपनाना जरूरी है।

कार्यक्रम में “झिझक छोड़ो – खुलकर पूछो” नाम से प्रश्न मंच भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने गोपनीय रूप से भी अपने सवाल पूछे। वहीं “महीने के वो 5 दिन” विषय पर रोल प्ले प्रस्तुत कर माहवारी के दौरान किशोरियों की चुनौतियों को दर्शाया गया। आशा, अर्चना, श्वेता, जीनत, अंजू एवं अंजली राजभर द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।


संस्था प्रमुख शमीम अब्बासी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि “हमारी बेटियां, हमारा गौरव” अभियान का उद्देश्य बेटियों के स्वास्थ्य, सम्मान, शिक्षा और आत्मविश्वास को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि जागरूक और स्वस्थ किशोरियां ही समाज के बेहतर भविष्य की आधारशिला हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. संतोष कुमार त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर पीएम अर्शी फातिमा, असिस्टेंट डायरेक्टर फरहीन, आमिर, फैज़ान, जवाहरलाल, ओसामा, इंतजार, फखरे आलम, रविकांत, तनवीर, साजिद सहित बड़ी संख्या में फेलो, कम्युनिटी मोबिलाइजर, किशोर-किशोरियां एवं वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को माहवारी स्वच्छता से संबंधित जागरूकता सामग्री वितरित की गई।