गाजीपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के गाजीपुर आगमन की 97वीं वर्षगांठ के अवसर पर उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल गाजीपुर के तत्वावधान में संविधान चेतना केंद्र, बिन्दवलिया में “जहां पड़े गांधी के कदम, जहां पड़े कदम उनके वह माटी बनी महान—आज चलो फिर ढूंढे उन्हीं कदमों के निशान” विषय पर गांधी स्मरण सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गांधी के अक्टूबर 1929 के ऐतिहासिक गाजीपुर प्रवास, उनके विचारों, सिद्धांतों और सामाजिक सरोकारों को याद करते हुए उन्हें वर्तमान संदर्भ से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ।
स्मरण सभा में स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीकांत पांडेय, अंग्रेजी विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. रामनारायण तिवारी, सतीशचंद डिग्री कॉलेज बलिया के डॉ. जयप्रकाश कुशवाहा तथा प्रेसिडियम इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक माधव कृष्ण ने अपने विचार रखे।
माधव कृष्ण ने गांधी के सत्य, अहिंसा, त्याग, बलिदान, ग्राम स्वराज और स्वावलंबन के सिद्धांतों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि गांधी ऐसा निराला व्यक्तित्व थे, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी समाज के समावेशन के विचार का परित्याग नहीं किया।
डॉ. रामनारायण तिवारी ने गांधी को लोकनायक बताते हुए सार्वजनिक जीवन में सत्य के साथ उनके प्रयोगों को लोक संस्कृति से प्रेरित बताया। डॉ. जयप्रकाश कुशवाहा ने गांधी के आदर्शों की व्यवहारिकता तथा वंचित समुदायों की पीड़ा और उनके संघर्षों के प्रति गांधी के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
वरिष्ठ गांधीवादी ईश्वरचंद ने कहा कि गांधी की स्वीकार्यता और प्रासंगिकता पूरी दुनिया में है। उनकी विरासत और विचारों को जन-जन तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल गाजीपुर के मंत्री काजी फरीद आलम ने कहा कि गांधी के कदमों के निशान केवल उन स्थानों तक सीमित नहीं हैं, जहां उन्होंने यात्रा की थी, बल्कि उनके वास्तविक पदचिह्न उनके विचारों, आदर्शों और सिद्धांतों में हैं, जिन्हें समाज को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
सभा की अध्यक्षता कर रहे डॉ. श्रीकांत पांडेय ने गांधी के विचारों को वर्तमान संदर्भ से जोड़ते हुए युवाओं को गांधी को नए दृष्टिकोण से समझने और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने की दिशा में प्रेरित किया। विषय प्रवर्तन समाजसेवी काजी फरीद आलम ने किया, जबकि संचालन नेहरू युवा केंद्र के सेवानिवृत्त लेखाकार सुभाष चंद्र प्रजापति ने किया।
कार्यक्रम में साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी, कवि एवं शिक्षक नागेश कुमार मिश्रा, संतोष कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य कवियों ने ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण कविताओं की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर शहर कांग्रेस कमेटी के अय्यूब खान, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ईश्वरलाल, कैलाश कुशवाहा, गंगासागर कुशवाहा, हनुमान यादव, सुभाष चंद्र, नैयर समदानी सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुष उपस्थित रहे। संविधान चेतना केंद्र का सभागार गांधी के विचारों, सिद्धांतों और आदर्शों की चर्चा से सराबोर रहा।

