गाजीपुर। राज्य परियोजना निदेशक, लखनऊ के निर्देशानुसार जनपद के परिषदीय विद्यालयों में आयोजित किया जा रहा ‘नो बैग डे’ अब बच्चों के लिए पढ़ाई से इतर सीखने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का अनूठा अवसर बन गया है। बिना बस्ते के विद्यालय पहुंच रहे बच्चे खेलकूद, कला, संगीत, योग, कहानी-कथन, कविता, हस्तकला और विभिन्न अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से ‘करके सीखने’ की प्रक्रिया से जुड़ रहे हैं।

विद्यालयों में बच्चों की रुचि और स्थानीय परिवेश को ध्यान में रखते हुए चित्रकला, खेलकूद, स्थानीय कला एवं शिल्प, बागवानी, स्वच्छता जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, जीवन-कौशल तथा समूह गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों में बच्चे पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। इससे उनके भीतर सहयोग की भावना, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास, समस्या समाधान और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित हो रहे हैं।

कक्षा से बाहर भी शिक्षा का नया अनुभव

‘नो बैग डे’ को विद्यालयों में महज मनोरंजन का माध्यम न बनाकर अनुभवात्मक शिक्षा का प्रभावी मंच बनाया जा रहा है। शिक्षक बच्चों को गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल कर रहे हैं, जिससे विद्यालय का वातावरण अधिक आनंदमय, रुचिकर और बाल-केंद्रित बन रहा है।

स्थानीय संसाधनों और परिवेश से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से बच्चे अपने आसपास की प्रकृति, समाज, कला और संस्कृति को करीब से समझ रहे हैं। इससे उनमें अपने स्थानीय परिवेश और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव भी मजबूत हो रहा है।

प्रतिभा पहचानने का बन रहा माध्यम

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ‘नो बैग डे’ के माध्यम से बच्चों को अपनी रुचि और प्रतिभा पहचानने तथा उसे विकसित करने का अवसर मिल रहा है। विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता से बच्चों का सर्वांगीण विकास हो रहा है और उनमें सीखने के प्रति उत्साह भी बढ़ रहा है।

जिला बेसिक शिक्षा विभाग, गाजीपुर की ओर से विद्यालयों को ‘नो बैग डे’ की गतिविधियों को प्रभावी, उद्देश्यपूर्ण और बच्चों की आयु व रुचि के अनुरूप संचालित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों से अपेक्षा की गई है कि वे विविध गतिविधियों के माध्यम से प्रत्येक ‘नो बैग डे’ को बच्चों के लिए सीखने का आनंदमय, रचनात्मक और यादगार अनुभव बनाएं।

कुल मिलाकर, गाजीपुर के परिषदीय विद्यालयों में ‘नो बैग डे’ बच्चों के कंधों से बस्ते का बोझ हटाकर उनके भीतर छिपी प्रतिभा, कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास को पंख देने की दिशा में एक सराहनीय पहल बनकर उभर रहा है।