वाराणसी। प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूल विद्यालय कल्याण एसोसिएशन, वाराणसी ने शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दों को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी वाराणसी को एक पत्रक सौंपा। पत्रक के माध्यम से संगठन ने आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों के हितों से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया।

एसोसिएशन ने मांग की कि आरटीई के अंतर्गत पढ़ने वाले बच्चों के बैंक खातों में सुधार कराते हुए उन्हें मिलने वाली सहायता राशि का शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी पात्र बच्चों की शत-प्रतिशत अपार आईडी जनरेट करने के लिए यू-डायस (UDISE) पोर्टल पर विद्यालय स्तर से संशोधन की अनुमति दी जाए। इसके अतिरिक्त, शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि में वृद्धि कर समय से भुगतान करने की भी मांग उठाई गई।

संगठन के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि सत्र 2024–25 में आरटीई के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों के लिए शासन द्वारा सहायता राशि का शत-प्रतिशत आवंटन किए जाने के बावजूद, कई बच्चों को यह धनराशि नहीं मिल पा रही है। इसका मुख्य कारण बैंकों के आपसी मर्ज के चलते बदले हुए आईएफएससी कोड, बंद हो चुके बैंक खाते तथा तकनीकी त्रुटियां हैं। इन समस्याओं के कारण बच्चों का भुगतान अटक जा रहा है, जिसका सीधा असर गरीब और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।

विद्यार्थी हित को सर्वोपरि बताते हुए संगठन ने मांग की कि यू-डायस पोर्टल पर विद्यालय स्तर से शत-प्रतिशत संशोधन की सुविधा दी जाए। इसमें विशेष रूप से आधार कार्ड के अनुरूप बच्चों के नाम में सुधार, सरनेम जोड़ने या हटाने तथा कम से कम चार वर्ण तक संशोधन की अनुमति विद्यालय स्तर पर देने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि एसआर (स्कूल रिकॉर्ड) के अनुरूप सही जानकारी दर्ज की जा सके।

इसके साथ ही संगठन ने यह भी बताया कि यू-डायस के प्रारंभिक दौर में प्री-प्राइमरी तथा कक्षा 1, 2 और 3 में नामांकन के दौरान भ्रम की स्थिति के कारण कई विद्यालयों द्वारा बच्चों की कक्षा गलत दर्ज हो गई थी। ऐसे में अब कक्षा शिफ्ट करने की सुविधा भी विद्यालय स्तर पर उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिससे बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड में सुधार हो सके।

पत्रक में एक महत्वपूर्ण मांग शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि बढ़ाने को लेकर भी उठाई गई। अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि आरटीई अधिनियम 2009 लागू होने के बाद से अब तक विद्यालयों को मात्र ₹450 प्रति माह प्रति छात्र की दर से शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जा रहा है। जबकि बीते 15 वर्षों में महंगाई लगातार बढ़ी है, जिससे विद्यालयों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश को छोड़कर अन्य कई राज्यों में यह राशि पहले ही बढ़ाई जा चुकी है। ऐसे में महंगाई को ध्यान में रखते हुए शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि ₹2500 प्रति माह किए जाने की मांग की गई।

जिलाधिकारी को पत्रक सौंपने के दौरान संगठन के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता के साथ मातादीहल, पांडे रविकांत, अजय कुमार गुप्ता, दीपक कुमार गुप्ता, रविंद्र नाथ, अंजनी यादव, अमरनाथ यादव, अशोक सिंह, बंशीलाल चौधरी, गोपाल प्रसाद गुप्ता (एडवोकेट) सहित संगठन के सैकड़ों पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।

संगठन ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, ताकि आरटीई के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों को समय पर उनका हक मिल सके और विद्यालयों की आर्थिक समस्याओं का भी समाधान हो सके।