इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से खुली साजिश, ग्वालियर में जिंदा मिली कथित मृतका, पुलिस की बड़ी कार्रवाई


गाजीपुर। थाना सादात पुलिस टीम ने एक बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश करते हुए उस महिला को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने अपनी जिंदा पुत्री को मृत बताकर उसके ससुरालजनों के खिलाफ दहेज हत्या का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस की सूझबूझ, तकनीकी विवेचना और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर यह सच्चाई सामने आई कि कथित मृतका पूरी तरह जीवित है और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रह रही थी।

जानकारी के अनुसार, दिनांक 03 अक्टूबर 2025 को राजवन्ती देवी पत्नी स्व0 रामजी दास, निवासी ग्राम बरहपार भोजूराय, थाना सादात, जनपद गाजीपुर द्वारा थाना सादात में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया गया था कि उसकी पुत्री रुचि (काल्पनिक नाम) को उसके ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया और बाद में उसकी हत्या कर शव को गायब कर दिया गया। इस प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना सादात में मु0अ0सं0 198/25 धारा 191(2)/85/80(2)/238/352 बीएनएस एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।

मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी सैदपुर द्वारा की जा रही थी। विवेचना के दौरान जब इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया गया तो सामने आया कि वादिनी की पुत्री रुचि जीवित है और वर्तमान समय में ग्वालियर, मध्य प्रदेश में मौजूद है। इस गंभीर तथ्य के सामने आने के बाद क्षेत्राधिकारी सैदपुर के निर्देशन में थाना सादात की एक पुलिस टीम गठित की गई और उच्चाधिकारियों से गैर प्रांत जाने की अनुमति प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

सुरागरसी के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि पीड़िता ग्वालियर से निकलकर सादात क्षेत्र की ओर आ रही है। तत्परता दिखाते हुए पुलिस टीम ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर बरहेता पुल के पास से कथित मृतका रुचि को जिंदा और सकुशल बरामद कर लिया। पीड़िता की बरामदगी के बाद पूरा मामला फर्जी और मनगढ़ंत पाए जाने की पुष्टि हुई।

अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत दिनांक 10 जनवरी 2026 को थानाध्यक्ष सादात मय हमराह द्वारा अपनी जिंदा बेटी को मृत बताकर उसके ससुरालजनों के विरुद्ध फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाली वादिनी राजवन्ती देवी को ग्राम बरहपार भोजूराय, थाना सादात से गिरफ्तार कर लिया गया। अभियुक्ता के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई प्रचलित है।

इस प्रकरण ने एक ओर जहां पुलिस की सतर्कता और विवेचनात्मक क्षमता को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून को गुमराह कर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।