(विशेष रिपोर्ट :बीबीसी-इण्डिया /विश्वावाणी समाचार /डा.अरविंद गाँधी/डा.सविता पूनम)

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की राजधानी काशी में धूम धाम के साथ विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली का भरत मिलाप भारी वर्षा के साथ अपनी पुरानी परंपराओं के बीच सकुशल सम्पन्न हुआ। 

           वाराणसी के नाटी इमली स्थित लीला स्थल पर एकदशी के दिन मनाये जाने वाले इस भरत मिलाप में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ठीक 4 बजकर 40 मिनट पर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण ने अपने सामने भरत, शत्रुघ्न को नतमस्तक देख दौड़कर उन्हें उठाया और गले लगा लिया।, इसी दौरान अपनी अश्रुधाराओं के बीच श्रीराम काफी देर तक भाइयों को गले लगाए रहे। इस दौरान क्या नर क्या नारी ,क्या बूढ़े ,क्या नव जवान सभी अपनी आस्था के साथ डेट रहे ,सभी ने हर हर महादेव और जय श्रीराम के नारे से बाबा विश्वनाथ की नगरी को गुंजायमान कर दिया।

                    यह गूंज आज कोरोना महामारी से निपटने के बाद चौथा मौका है जब आज पुन: चित्रकूट रामलीला समिति की रामलीला का भरत मिलाप दैवीय शक्तियों के बीच हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संपन्न हुआ।

                     ज्ञातव्य हो कि आज की यह भरत मिलाप जो पूरे दुनिया में विख्यात है लोग काफी इंतजारी के साथ भगवान तथा काशी राज के दर्शन के लिए सड़कों पर उतर गए और उनके दर्शन पाने के उत्सुकता में अपनी निगाहें लगाएं जमायें रहें। भक्तो को भगवान का यह लीला देखने को मिला और जैसे ही घड़ी में चार बजकर 40 मिनट का समय हुआ और अस्ताचलगामी सूर्य की रौशनी एक नियत स्थान पर पड़ी गोस्वामी तुलसी दास की लिखी गयी पंक्तियां जैसे ही कंठ से फूटी 14 वर्षों पश्चात वनवास से वापस लौटे भगवान् श्रीराम भाइयों को देख खुद को रोक न पाए और उनकी तरफ दौड़ पड़े।

इसके बाद यादव बंधुओं /यदुवंशी समुदाय ने एक रथ पर सभी भाइयों, माता सीता को उठाकर मेला स्थल पर मौजूद लोगों को चारों दिशा में रथ घुमाकर दर्शन कराया । भारत मिलाप शुरू होने से पहले ही पूर्व काशीराज अनंत नारायण सिंह पूर्व की भांति अपने हाथी में बैठकर लीला स्थल पहुंचे तो सभी काशीवासियों ने हर हर महादेव के उद्घोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

            उन्होंने देव् स्वरूपों को सोने की गिन्नियां भेंट की और उसके चंद क्षणों बाद लीला शुरू हो गयी।

       हमारे वाराणसी स्थित वीर अर्जुन के ब्यूरो चीफ डा. अरविंद गांधी विशेष संवाददाता डा. सविता पूनम के अनुसार इस लीला को देखने के लिए क्या बच्चे,क्या बुजुर्ग सबके मन में केवल एक ही श्रद्धा थी कि किसी प्रकार भगवान का दर्शन हो।

        सनातन संस्कृति को नजदीक से देखने के लिये भारत के कोने कोने से तो लोग आते है।   

            वहीं यादव बंधु वर्षो से जो कई पीढ़ियों से चली आ रही इस प्राचीन परम्परा का निर्वहन भी वखुबी करते नजर आए।

                काशी की यह रामलीला /भारत मिलाप काफी मशहूर है और काशी के लक्खा मेले के रूप में प्रख्यात है । विजया दशमी के दूसरे दिन नाटी इमली क्षेत्र में स्थित यह भारत मिलाप ढलते सूर्य यानि गोधूलि बेला में सूर्यास्त के पहले होने वाला विश्व विख्यात 'भरत मिलाप' का मंचन किया गया।

        श्री चित्रकूट रामलीला समिति काशी के मंत्री मोहन कृष्ण अग्रवाल ने बताया जाता है क‍ि यह 484 साल पुरानी परंपरा के तहत भरत मिलाप संपन्न हुआ है।

            5 मिनट के इस लीला को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। 

                खास बात ये है क‍ि लीला खत्म होने के बाद लोग घर न जाकर पहले कहीं व‍िश्राम करते हैं फ‍िर घर जाते हैं। इस लीला में पूर्व काशीराज अनंत नारायण सिंह खुद गजराज /हाथी पर सवार होते है और भगवान की परिक्रमा करते हैं और सोने की गिन्नी देकर प्रसाद लेतेहै फिर अपने वाराणसी के रामनगर स्थित राजनिवास दुर्ग के लिए प्रस्थान करते हैं इस बीच काशी के विशेश्वरगंज स्थित नागरी प्रचारिणी सभा परिसर में कुछ समय विश्राम करते हैं इस मौके पर उनके साथ राजपरिवार के भी कई अन्य सदस्य भी हाथी पर सवार थे,जिन्होंने भी भगवान का दर्शन किया और आशीर्वाद लिया।साथ ही इस अवसर पर श्री चित्रकूट रामलीला समिति काशी के समस्त पदाधिकारी एवं प्रबंध समिति के सभी सदस्यगण मौजूद थे।