हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी गौस ए पाक को सूफी परंपरा में गौस उल आजम संतों के सरताज और पीरों के पीर दस्तगीर के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है
जमानियां। मूुस्लिम घरों में साफ सफाई के बाद हजरत शेख अब्दुल कादिर जलानी के नाम पर फातिहा कराई गई। हज़रत शेख अब्दुल कादिर जिलानी (गौस-ए-पाक) को सूफी परंपरा में 'गौस-उल-आज़म' (संतों के सरताज) और पीरो के पीर दस्तगीर' के रूप में सर्वोच्च आध्यात्मिक स्थान प्राप्त किए है। गौस-ए-पाक की शान और पैदाइशी वली थे। आप जन्म से ही अल्लाह के वली (प्रिय संत) थे। और बाल्यावस्था से ही रमजान के महीनों में दिन के समय दूध नहीं पीते (रोजा रखते) थे। आपकी महानता का अंदाजा इस बात से लगाया जाता है। कि आपका मर्तबा इतना ऊंचा था। कि बुजुर्गों के मुताबिक औलिया-ए-किराम की महफिलों में आपका स्थान सर्वोपरि रहा है। आपने बगदाद (इराक) को अपना केंद्र बनाया और पूरी दुनिया में इस्लाम, इंसानियत, और रूहानी तालीम का प्रचार किया। नूरी मस्जिद के इमाम अशरफ करीम कादरी ने बताया जाता हर इस्लामिक महीने की 11 तारीख (विशेषकर रबीउल आखिर की ग्यारवीं) को आपके नाम पर फातिहा और जिक्र का विशेष आयोजन किया जाता है। दुनिया भर के अकीदतमंद आपको 'दस्तीगीर' (मदद करने वाला)कहते हैं। जो गरीबों, बेसहारा लोगों और मुसीबत में फंसे लोगों की सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि हज़रत गौस पाक-जीवन इतिहास, चमत्कार (कनामात) या कादिरी सिलसिले के बारे में और अधिक विस्तार से जानना चाहते हैं। शेख अब्दुल कादिर जिलानी का जीवन और विरासत ग़ौस पाक की महिमा और महानता अल्लाह सर्वशक्तिमान ने गौस-उल-आजम को महान सम्मान प्रदान किया है। अल्लाह की रहमत उन पर रहा है। इसलिए गौस-उल-आजम की महानता हासिल किए। अशरफ करीम कादरी ने बताया कि हज़रत शैख अब्दुल कादिर जिलानी (गौस-ए-पाक) को सूफीवाद में गौसउल-आज़म (संतों के सरदार) और पीरान-ए-पीर के महान रुतबे से नवाज़ा गया है। उन्होंने बताया कि गौस-ए-पाक की शान और महानता और उनकी पैदाइश की शुरुआती जीवन जैसे कि जन्म फारस (वर्तमान ईरान) के (गिलान) प्रांत में हुआ था। आप जन्म से ही अल्लाह के वली (प्रिय संत) थे। आपको अल-गौस अल-आज़म कहा जाता है। जिसका अर्थ यह है। कि वह महान आध्यात्मिक मददगार जो अपने समय के संतों के केंद्र (कुतुब) रहे। जो दुनिया भर में फैलाव और रूहानी सुकून का बड़ा जरिया बना। आपके ज्ञान, संयम, और (करमातों) से पूरी दुनिया में चर्चा के केंद्र रहे हैं।

