गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर जंगीपुर थाना क्षेत्र में एक पत्रकार पर कथित रूप से जानलेवा हमले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार प्रदीप दुबे पुत्र रामजी दुबे के घर पर कुछ दबंगों ने धावा बोल दिया। आरोप है कि हमलावरों ने पहले मकान की दीवार तोड़ी, फिर जबरन घर में प्रवेश किया और कमरे में घुसकर शटर का ताला तोड़ते हुए जमकर तोड़फोड़ की।
पीड़ित पत्रकार प्रदीप दुबे का कहना है कि हमलावरों का इरादा केवल तोड़फोड़ तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें जान से मारने की नीयत से हमला किया गया। घटना के दौरान घर में अफरा-तफरी मच गई और परिजन भयभीत हो उठे। शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हुए, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
इलाके में पहले से तनाव
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ दिन पूर्व भी क्षेत्र में दीवार तोड़ने और मारपीट का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिससे इलाके में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में पत्रकार के घर पर हुए इस हमले ने क्षेत्र में दहशत का माहौल और गहरा कर दिया है।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास
बताया जा रहा है कि इस मामले में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनका आपराधिक इतिहास भी रहा है। सूत्रों के अनुसार, आरोपित पक्ष का संबंध जैन विक्रम सिंह पुत्र विनोद सिंह, निलेश सिंह पुत्र रत्न सिंह, भोला ठाकुर पुत्र रतन सिंह, लकी राजभर निवासी हंसराजपुर बनौली तथा कर्मवीर सिंह उर्फ सोनू से बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, कर्मवीर सिंह सोनू शादियाबाद थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर बताया जाता है और हत्या व लूट से जुड़े मामलों में जेल जा चुका है। इसी प्रकार भोला ठाकुर पर भी हत्या से संबंधित कई मामले दर्ज होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक नहीं की गई है।
पुलिस ने शुरू की जांच
पीड़ित पक्ष ने जंगीपुर थाने में लिखित तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय पत्रकार संगठनों में भी आक्रोश देखा जा रहा है और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की जा रही है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर असंतोष और बढ़ सकता है।

