गाजीपुर। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति एवं साहित्य चेतना समाज के संयुक्त तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अंतर्गत क्षेत्रीय रेल प्रशिक्षण संस्थान के सभागार में एक भव्य कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्यिक चेतना, भाषा-संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत इस कार्यक्रम ने श्रोताओं को विचार, भाव और रस की त्रिवेणी में डुबो दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा, क्षेत्रीय रेल प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य जयप्रकाश सिंह तथा साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। दीप-प्रज्ज्वलन के साथ ही सभागार साहित्यिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।


कवि-सम्मेलन की शुरुआत डी.ए.वी. इंटर कॉलेज, गाजीपुर के हिंदी के आचार्य डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने माँ सरस्वती की वंदना से की। उनकी वीणावादिनी की स्तुति ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। इसके पश्चात व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने अपनी सशक्त व्यंग्य कविता—

‘राशन कार्ड में मर गया, आधार में था जिंदा।

अब न घर का ना घाट का, वह बन गया खरबंदा।’

सुनाकर व्यवस्था की विसंगतियों पर करारा प्रहार किया, जिस पर श्रोताओं ने तालियों के साथ अपनी सहमति जताई।

साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने अपनी व्यंग्यात्मक रचना—

‘बन के रहना, पति के चरणों की दासी।

घर को बनाना स्वर्ग और घर वालों को स्वर्गवासी।’

प्रस्तुत कर हास्य का रंग बिखेरा और श्रोताओं को गुदगुदाने में सफल रहे।


ग़ज़लकार नागेश मिश्रा ने अपनी ग़ज़ल—

‘वक्त गुजर जाता है, सारी उम्र ढल जाती है,

मुट्ठी जितनी कसकर रखें, रेत फिसल जाती है।’

सुनाकर प्रेम और जीवन-दर्शन का भावपूर्ण चित्र खींचा। उनकी ग़ज़ल ने सभागार को प्रेमरस से सराबोर कर दिया।

इसके बाद डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने अपनी गंभीर और विचारोत्तेजक कविता—

‘ओ जागृत विवेक! संभालो हमें, रोशनी दो,

बख्शो हमें मोहब्बतों की सल्तनत

और समझा दो उन मदान्ध अहंताओं को,

कि शांत रहने पर ही समुद्र विराट और खूबसूरत लगता है।’

प्रस्तुत कर श्रोताओं की भरपूर वाहवाही लूटी।

रेल प्रशिक्षण संस्थान के अनुदेशक एवं राजभाषा प्रभारी सुनील कुमार सिंह ने अपनी आत्मचिंतन से भरी कविता—

‘मैं सब कुछ भूला बैठा हूं, सब याद दिलाने आ जाओ।

मैं क्या हूं और मैं कैसा हूं? मुझे मुझसे मिलने आ जाओ।’

सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। वहीं संस्थान के अनुदेशक दिनेश कुमार ने मधुर स्वर में अपनी ग़ज़ल—

‘वह दौर अलग था जब चुपचाप वो रहते थे,

सुना है कि अब वो मुस्कुराने लगे हैं।’

प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के अंत में ओज के कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने अपनी राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविता—

‘शहीदों के चिराग को गुलशन से बुझने नहीं देंगे,

स्वतंत्रता की कश्ती को हरगिज डूबने नहीं देंगे।’

सुनाकर माहौल को ओज, उत्साह और देशभक्ति से भर दिया।

कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने की। कार्यक्रम का प्रारंभिक संचालन सुनील कुमार सिंह ने किया, जबकि संपूर्ण कवि-सम्मेलन का कुशल संचालन डॉ. संतोष कुमार तिवारी द्वारा किया गया।

इस अवसर पर राजभाषा अधिकारी अतुल सिंह, जयवीर सिंह, बृजेश शुक्ला, अजीत राय, पंकज कुमार, सुशांत सिन्हा, पूर्णेन्दु कुमार, अजीत कुमार, अभय यादव सहित अनेक साहित्य-प्रेमी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कवियों का स्वागत नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने किया, जबकि अंत में क्षेत्रीय रेल प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य जयप्रकाश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कुल मिलाकर ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम साहित्य, भाषा और संवेदना का एक सशक्त मंच बनकर उभरा, जिसने गाजीपुर के साहित्यिक परिदृश्य को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।