(भाग-1)
गाजीपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ समाजवादी नेता डॉ. समीर सिंह छात्र राजनीति से निकलकर आज सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। समाजवादी विचारधारा और वरिष्ठ समाजवादी नेताओं के विचारों से प्रभावित डॉ. समीर सिंह ने अपने राजनीतिक सफर में समतामूलक समाज की परिकल्पना को महत्वपूर्ण स्थान दिया है। लगभग 20 से 25 वर्षों की अपनी राजनीतिक यात्रा में उन्होंने छात्र राजनीति से लेकर पार्टी संगठन तक के विभिन्न अनुभवों को करीब से देखा और समझा है।

यूनाइटेड मीडिया टीम के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान डॉ. समीर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी शुरुआत छात्र राजनीति से हुई थी। छात्र जीवन में राजनीति से जुड़ने के बाद उनका सफर समाजवादी पार्टी के साथ आगे बढ़ा। इस दौरान उन्हें राजनीतिक परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव, संगठनात्मक गतिविधियों और बदलते राजनीतिक परिवेश को समझने का अवसर मिला।

डॉ. समीर सिंह ने अपनी राजनीतिक विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि वह नेताजी के पदचिह्नों पर चलते हुए समतामूलक समाज की कल्पना को लेकर सक्रिय राजनीति में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ समाजवादी नेताओं के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया है। इनमें डॉ. राममनोहर लोहिया, राज नारायण जी और चौधरी जी जैसे नेताओं की विचारधारा और उनके बताए रास्ते का विशेष उल्लेख किया।

समाजवादी चिंतन में सामाजिक समानता, वंचित वर्गों की भागीदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज के सभी वर्गों को अवसर उपलब्ध कराने जैसे विषयों को महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। डॉ. समीर सिंह के राजनीतिक दृष्टिकोण में भी समतामूलक समाज की परिकल्पना का उल्लेख प्रमुखता से सामने आया। उनके अनुसार, राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता या पद तक पहुंचना नहीं, बल्कि समाज के व्यापक हितों से जुड़े सवालों को समझना और उन पर काम करना भी है।

समाजवादी विचारधारा और कार्यकर्ताओं के सम्मान पर जोर

बातचीत के दौरान डॉ. समीर सिंह ने समाजवादी पार्टी की संगठनात्मक भूमिका पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी ऐसी पार्टी है, जो समाज के विभिन्न वर्गों के कार्यकर्ताओं को सम्मान देने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने की बात करती है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं के सम्मान को राजनीति का एक महत्वपूर्ण पक्ष बताया। किसी भी राजनीतिक संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम होती है, क्योंकि वे जनता के बीच रहकर संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाते हैं और स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं से जुड़ते हैं। कार्यकर्ताओं को सम्मान और अवसर मिलना संगठन की आंतरिक भागीदारी तथा नेतृत्व के विकास से भी जुड़ा विषय है।

डॉ. समीर सिंह के विचारों के अनुसार, समाजवादी राजनीति को समझने के लिए उसके वैचारिक आधार और उन नेताओं के योगदान को जानना आवश्यक है, जिन्होंने सामाजिक समानता तथा लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया।

छात्र राजनीति और सक्रिय राजनीति में अंतर

डॉ. समीर सिंह ने छात्र राजनीति और किसी राजनीतिक दल का सदस्य बनने के बाद की राजनीति के बीच के अंतर को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक, छात्र राजनीति भावनाओं, उत्साह और अपने विचारों को सामने रखने की राजनीति होती है। छात्र जीवन में युवा अपने मुद्दों को लेकर सक्रिय होते हैं और अपनी बात रखने के लिए संघर्ष करते हैं।

वहीं, सक्रिय दलीय राजनीति में संगठन की नीतियों, सामूहिक निर्णयों, राजनीतिक परिस्थितियों और जनअपेक्षाओं को समझना जरूरी होता है। यहां विचारधारा के साथ-साथ संगठनात्मक जिम्मेदारी, संवाद और परिस्थितियों के अनुरूप काम करने की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति तक का सफर किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता के लिए सीखने की निरंतर प्रक्रिया है। इस दौरान उसे अपने विचारों को व्यापक सामाजिक संदर्भ में समझने और संगठन के भीतर अपनी भूमिका तय करने का अवसर मिलता है।

डॉ. समीर सिंह की लगभग दो दशकों से अधिक की राजनीतिक यात्रा इसी अनुभव से जुड़ी है। उनकी बातचीत में छात्र राजनीति से मिली सीख, समाजवादी पार्टी के साथ उनका जुड़ाव और वरिष्ठ समाजवादी नेताओं के विचारों से प्रभावित होकर सक्रिय राजनीति में काम करने का दृष्टिकोण सामने आया।

समतामूलक समाज की परिकल्पना पर चर्चा

समतामूलक समाज की अवधारणा का अर्थ ऐसा समाज बनाने के प्रयास से है, जहां सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने, प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान देने तथा अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाए। समाजवादी विचारधारा में यह अवधारणा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है।

डॉ. समीर सिंह ने अपनी राजनीतिक सोच को इसी परिकल्पना से जोड़ते हुए नेताजी के पदचिह्नों पर चलने और वरिष्ठ समाजवादी नेताओं के विचारों से प्रेरणा लेने की बात कही। उनके विचारों के अनुसार, राजनीति में विचारधारा का महत्व तभी सार्थक होता है, जब उसे सामाजिक जीवन और जनसरोकारों से जोड़कर देखा जाए।

गाजीपुर की राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में डॉ. समीर सिंह की यह बातचीत उनके राजनीतिक अनुभव, समाजवादी विचारधारा के प्रति दृष्टिकोण और छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति तक के सफर को सामने रखती है। साथ ही, यह चर्चा कार्यकर्ताओं के सम्मान, समान अवसर और सामाजिक समानता जैसे विषयों को भी रेखांकित करती है।

 डॉ. समीर सिंह का कहना है कि उनकी राजनीतिक यात्रा छात्र राजनीति से शुरू होकर समाजवादी पार्टी तक पहुंची है। नेताजी के पदचिह्नों पर चलते हुए तथा डॉ. राममनोहर लोहिया, राज नारायण जी और चौधरी जी जैसे वरिष्ठ समाजवादी नेताओं के विचारों से प्रभावित होकर वह समतामूलक समाज की परिकल्पना के साथ सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

         क्रमशः भाग- 2 अगले अंक में...