गाजीपुर। करंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़सरा के बगल में बिना मानक के मयंक पैथोलॉजी सेंटर चलाया रहा है। बताया जाता है कि जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर अनट्रेंड पैथोलॉजी संचालक स्वयं करके देता है। जो कि जांच रिपोर्ट तत्काल तैयार करके मरीज को दे भी दिया जाता हैं। जिसमे कुछ न कुछ गड़बड़ झाला जरूर होता होगा। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय जिम्मेदार अफसर इन अवैध पैथोलॉजी केंद्रो पर क्यों मेहरबानी दिखा रहे है? अगर मेहरबानी नही दिखाते तो उचित कार्रवाई करते हुए, अपने उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके होते। बिना रजिस्ट्रेशन और अधिकृत मान्यता न होने के बावजूद भी केंद्र संचालित हो रहे है। और लोगो की जिंदगियों से खुलेआम खेलवाड़ कर रहे है। फिलहाल क्षेत्रीय लोगो में सवाल उठ रहा है कि जनपद की डीएम और सीएमओ कब ऐसे मामले को गंभीरता से संज्ञान लगे। सूत्रों की मानें तो जांच के नाम पर मरीजों से अनाप शनाप पैसा लिया जाता है। और रिपोर्ट में भी गड़बड़ी की शिकायत बताई जाती है। शर्म करो जिम्मेदारों पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का रजिस्ट्रेशन, पंजीकृत मेडिकल वेस्ट सर्विस से एग्रीमेंट, सीएमओ आफिस का रजिस्ट्रेशन, फायर ब्रिगेड का परमिशन और किरायनामा इत्यादि कागज़ात होना आवश्यक है या नहीं! इसके विपरीत सारे नियमों को ताक पर रखकर करप्शन का खुल्ला खेल होना क्या उचित है? या अवैध केन्द्र बंद होना चाहिए। ये गाजीपुर की लोकप्रिय जिलाधिकारी (डीएम) को तय करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह, डीएम लेंगी संज्ञान...?
गाजीपुर। करंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़सरा के बगल में बिना मानक के मयंक पैथोलॉजी सेंटर चलाया रहा है। बताया जाता है कि जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर अनट्रेंड पैथोलॉजी संचालक स्वयं करके देता है। जो कि जांच रिपोर्ट तत्काल तैयार करके मरीज को दे भी दिया जाता हैं। जिसमे कुछ न कुछ गड़बड़ झाला जरूर होता होगा। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय जिम्मेदार अफसर इन अवैध पैथोलॉजी केंद्रो पर क्यों मेहरबानी दिखा रहे है? अगर मेहरबानी नही दिखाते तो उचित कार्रवाई करते हुए, अपने उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके होते। बिना रजिस्ट्रेशन और अधिकृत मान्यता न होने के बावजूद भी केंद्र संचालित हो रहे है। और लोगो की जिंदगियों से खुलेआम खेलवाड़ कर रहे है। फिलहाल क्षेत्रीय लोगो में सवाल उठ रहा है कि जनपद की डीएम और सीएमओ कब ऐसे मामले को गंभीरता से संज्ञान लगे। सूत्रों की मानें तो जांच के नाम पर मरीजों से अनाप शनाप पैसा लिया जाता है। और रिपोर्ट में भी गड़बड़ी की शिकायत बताई जाती है। शर्म करो जिम्मेदारों पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का रजिस्ट्रेशन, पंजीकृत मेडिकल वेस्ट सर्विस से एग्रीमेंट, सीएमओ आफिस का रजिस्ट्रेशन, फायर ब्रिगेड का परमिशन और किरायनामा इत्यादि कागज़ात होना आवश्यक है या नहीं! इसके विपरीत सारे नियमों को ताक पर रखकर करप्शन का खुल्ला खेल होना क्या उचित है? या अवैध केन्द्र बंद होना चाहिए। ये गाजीपुर की लोकप्रिय जिलाधिकारी (डीएम) को तय करना चाहिए।

