गाजीपुर में डीएम अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में धान खरीद कार्यशाला आयोजित, 1 नवंबर से शुरू होगी खरीद; केंद्रों पर व्यवस्था दुरुस्त रखने और किसानों से सम्मानजनक व्यवहार करने की हिदायत
गाजीपुर। जनपद में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत धान खरीद की तैयारियों को लेकर बुधवार देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सभी क्रय संस्थाओं के प्रभारियों और केंद्र प्रभारियों को धान खरीद से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। खरीद प्रक्रिया में लापरवाही, अनावश्यक रूप से किसानों को वापस करने अथवा जरूरी व्यवस्थाओं के अभाव में खरीद बाधित होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
1 नवंबर से शुरू होगी धान खरीद
कार्यशाला में बताया गया कि जनपद में धान क्रय केंद्रों का संचालन 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा। सभी क्रय संस्थाओं को अपने अनुमोदित केंद्रों पर उपकरण, आवश्यक अभिलेख, तौल कांटे, श्रमिक और बोरों की व्यवस्था समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। मंडी समिति को सभी केंद्रों पर उपकरणों की व्यवस्था तत्काल पूर्ण कराने तथा बाट-माप विभाग को तौल कांटों का सत्यापन करने के लिए कहा गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी केंद्र पर बोरों की कमी के कारण खरीद बाधित नहीं होनी चाहिए। ऐसी स्थिति सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
ई-पॉप मशीन से होगी उपस्थिति और किसान की पुष्टि
धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र प्रभारियों को प्रतिदिन पूर्वाह्न 9 से 10 बजे के बीच ई-पॉप मशीन के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया। किसानों की पहचान आधार कार्ड और ई-पॉप मशीन पर उपलब्ध बायोमेट्रिक सत्यापन के आधार पर सुनिश्चित करने के बाद ही धान की खरीद की जाएगी।
यदि किसान के स्थान पर उसका कोई सदस्य धान बेचने आता है, तो केंद्र प्रभारी द्वारा मूल किसान और संबंधित सदस्य के आधार कार्ड की छायाप्रति सुरक्षित रखी जाएगी। श्रमिकों की उपस्थिति भी ई-पॉप मशीन के माध्यम से दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गीले या गंदे धान को तत्काल नहीं किया जाएगा खारिज
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि यदि किसान का धान गीला या गंदा पाया जाता है, तो उसे तत्काल अस्वीकृत नहीं किया जाएगा। किसान को केंद्र पर ही धान साफ करने और सुखाने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी धान निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने पर ही अस्वीकृति की कार्रवाई की जाएगी।
अस्वीकृति की स्थिति में रिजेक्शन रजिस्टर में किसान का नाम, पता, पंजीकरण विवरण, मोबाइल नंबर, धान की मात्रा और अस्वीकृति का कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही किसान को अपीलीय अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वह अपनी शिकायत दर्ज कराकर अपील कर सके। अपीलीय समिति में क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, मंडी सचिव, केंद्र प्रभारी और दो प्रगतिशील किसान शामिल होंगे।
किसानों से दुर्व्यवहार पर होगी कार्रवाई
सभी केंद्र प्रभारियों को किसानों के साथ शिष्टाचारपूर्वक व्यवहार करने और किसी भी किसान को अनावश्यक रूप से वापस नहीं करने की हिदायत दी गई। खरीद अवधि में केंद्र के बैनर पर अंकित मोबाइल नंबर चालू रखना अनिवार्य होगा। जिला और तहसील मुख्यालय से इन नंबरों का रैंडम आधार पर सत्यापन कराया जाएगा। मोबाइल नंबर बंद मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
धान की उतराई और सफाई के लिए किसान को श्रमिकों को अधिकतम 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त देने होंगे। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि खरीद केंद्रों पर किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो।
किसानों के खाते में 48 घंटे के भीतर भुगतान का लक्ष्य
क्रय एजेंसियों को निर्देशित किया गया कि किसानों से खरीदे गए धान का भुगतान उनके आधार से लिंक बैंक खाते में एनपीसीआई और भारत सरकार के पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से बैंक खाते का सत्यापन करने के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
सहकारिता विभाग के अंतर्गत संचालित केंद्रों के लिए संबंधित तहसील के अपर जिला सहकारी अधिकारी (एडीसीओ) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें नियमित निरीक्षण कर केंद्रों का संचालन अपनी निगरानी में कराने के निर्देश दिए गए। किसी भी अप्रिय स्थिति में केंद्र प्रभारी और एजेंसी प्रभारी के साथ संबंधित एडीसीओ की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
धान बेचने के लिए फार्मर आईडी और पंजीकरण जरूरी
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे धान बेचने से पहले किसान पहचान-पत्र यानी फार्मर आईडी सहित सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें। जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, वे कृषि विभाग के एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कराकर इसे प्राप्त कर सकते हैं।
फार्मर आईडी के लिए आधिकारिक लिंक:
https://upfr.agristack.gov.in/farmer-registry-up/#/
धान विक्रय के लिए खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान पंजीकरण शुरू हो चुका है। किसान मोबाइल फोन या जनसुविधा केंद्र के माध्यम से पंजीकरण कराकर समय से सत्यापन पूरा करा लें।
ई-उपार्जन पोर्टल:
https://fcs.up.gov.in/
इस सत्र में फार्मर आईडी वाले किसानों का विवरण पोर्टल पर स्वतः प्राप्त होगा। किसानों को अपनी श्रेणी और अन्य विवरणों की जांच कर उन्हें सुरक्षित करना होगा। यदि विवरण में कोई त्रुटि हो, तो एग्रीस्टैक पोर्टल, डीसीएस पोर्टल या संबंधित सर्वेयर से संपर्क किया जा सकता है। जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, उनका पंजीकरण पूर्व वर्षों की भांति सत्यापन प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। धान, बाजरा, मक्का और ज्वार के लिए एक ही पंजीकरण व्यवस्था लागू होने की जानकारी भी दी गई।
मंडी समिति के सचिव को स्पष्टीकरण जारी
कार्यशाला में सभी क्रय संस्थाओं को अपने अनुमोदित धान क्रय केंद्रों पर खरीद से संबंधित व्यवस्थाएं पूरी कर जिला खाद्य विपणन अधिकारी, गाजीपुर को रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। वहीं, धान खरीद के लिए तौल कांटों की उपलब्धता और आवश्यकता के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं देने पर सचिव, कृषि उत्पादन मंडी समिति जंगीपुर को स्पष्टीकरण जारी किया गया।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि धान खरीद अभियान को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने और उसका उचित मूल्य प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

