गाजीपुर। जनपद में अपराधियों को सजा दिलाने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शनिवार को मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। 31 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे राइफल क्लब में हुई बैठक में सितंबर माह के अभियोजन कार्यों, न्यायालयों में लंबित मामलों, सम्मन-वारंट की तामील और गवाहों की उपस्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।
समीक्षा में सामने आया कि सितंबर 2026 में अधीनस्थ न्यायालयों में भारतीय दंड संहिता के तहत कुल 64 वादों का निस्तारण हुआ। इनमें 23 मामलों में अभियुक्तों को सजा सुनाई गई, 16 मामले सुलह तथा 25 मामले कमिट के आधार पर निस्तारित हुए। वहीं अन्य अधिनियमों के तहत सात मामलों का निस्तारण हुआ और सभी सात मामलों में सजा हुई। इस प्रकार दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 30 मामलों में दोषसिद्धि हुई।
कई गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा
बैठक में सितंबर माह के दौरान न्यायालयों द्वारा सुनाई गई सजाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया। थाना जमानियां के वर्ष 2008 के एक मामले में अभियुक्त श्रीराम को आठ वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं थाना नगसर हाल्ट के हत्या के मामले में अभियुक्त लाल बहादुर को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।
थाना भुड़कुड़ा के हत्या से संबंधित मामले में अभियुक्त धमेन्द्र राजभर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। थाना गहमर के पॉक्सो एक्ट से जुड़े गंभीर मामले में अभियुक्त कृष्णा दूबे को आजीवन कारावास से दंडित किया गया।
इसी क्रम में थाना सैदपुर के पॉक्सो एक्ट के मामले में अभियुक्त रोहित यादव को 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा थाना नोनहरा के मामले में अभियुक्त संजीव राय उर्फ अन्नू को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। थाना जीआरपी के एनडीपीएस एक्ट के मामले में अभियुक्त अमरजीत बिंद को एक वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई।
इन मामलों में अभियोजन अधिकारियों द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जिसकी बैठक में समीक्षा की गई।
सम्मन-वारंट की कम तामील पर जताई चिंता
बैठक में गवाहों की न्यायालय में उपस्थिति को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए। अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 410 सम्मन/वारंट जारी किए गए, जिनमें से 356 की तामील कराई गई। तामील के सापेक्ष 271 गवाह उपस्थित हुए, जिनमें 266 गवाहों का न्यायालय में परीक्षण कराया गया।
वहीं सत्र न्यायालयों में 554 सम्मन जारी किए गए, जिनमें से 426 की तामील हुई। इसके सापेक्ष 315 गवाह उपस्थित हुए और 300 गवाहों का परीक्षण कराया गया। कुछ गवाहों का परीक्षण पीठासीन अधिकारियों के अवकाश तथा अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण नहीं हो सका।
मुख्य राजस्व अधिकारी ने सम्मन और वारंट की कम तामील पर चिंता जताते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि गवाहों तक सम्मन समय से पहुंचाया जाए और उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि मुकदमों का शीघ्र निस्तारण हो सके और अपराधियों को उनके अपराध के अनुरूप सजा दिलाई जा सके।
रिहा अभियुक्तों के मामलों की दोबारा होगी समीक्षा
मुख्य राजस्व अधिकारी ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) एवं लोक अभियोजकों को निर्देश दिया कि जिन मामलों में अभियुक्त रिहा हुए हैं, उनकी विधिवत पुनः समीक्षा की जाए। यदि सरकारी हित में अपील करना उचित हो तो अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे हैं, उनमें आवश्यकतानुसार संबंधित गवाहों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
हर माह एक केस डायरी तैयार करने का निर्देश
बैठक में अभियोजन अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा गया कि प्रत्येक अभियोजक हर महीने कम से कम एक मामले की केस डायरी तैयार करे। इसमें पुलिस विवेचना के दौरान हुई त्रुटियों और कमियों को दर्ज किया जाए। विशेष रूप से उन मामलों का विश्लेषण किया जाए, जिनमें न्यायालय से सरकार के विरुद्ध आदेश पारित हुआ है। इससे विवेचना की कमियों को दूर करने और अभियोजन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि प्रभावी अभियोजन, मजबूत विवेचना, गवाहों की समयबद्ध उपस्थिति और न्यायालय में सशक्त पैरवी के माध्यम से अधिकाधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

