जमानिया। 28, 29 एवं 30 अक्टूबर को हुई लगातार बारिश एवं प्रतिकूल मौसम के कारण धान की फसल को हुए भारी नुकसान का सर्वेक्षण कराकर प्रत्येक प्रभावित किसान को उचित मुआवजा एवं फसल बीमा की क्षतिपूर्ति दिलाए जाने के संबंध में एसडीएम जमानिया को ज्ञापन सौंपा गया। बताया जाता है। कि ग्राम पंचायत फूली तथा उसके आसपास के सैकड़ों किसान मुआवजे की मांग को लेकर तहसील मुख्यालय पहुंच एसडीएम सुश्री निधि को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान युवा पूर्व ग्राम प्रधान विजय कुमार यादव ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि जमानिया तहसील क्षेत्र, जिसे धान का कटोरा कहा जाता है। आज प्राकृतिक आपदा के गंभीर संकट से गुजर रहा है। दिनांक 28, 29 एवं 30 अक्टूबर को हुई लगातार बारिश एवं प्रतिकूल मौसम के कारण क्षेत्र के किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार फसल प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर धान की फसल गिर गई है, पानी में डूब गई है तथा दानों की गुणवत्ता और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा केि इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की साल भर की मेहनत, लागत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसान पहले ही महंगे बीज, खाद, दवा, डीजल, सिंचाई एवं मजदूरी का खर्च उठा चुका है। अब फसल खराब होने से उसके सामने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई तथा कृषि ऋण चुकाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों की प्रमुख समस्याएं एवं मांगें निम्नलिखित है। प्रत्येक किसान की फसल का वास्तविक सर्वेक्षण हो। यादव ने कहा केि वर्तमान व्यवस्था में 33 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्रफल में फसल क्षति होने की शर्त के कारण अनेक वास्तविक प्रभावित किसान मुआवजे से वंचित रह जाते हैं। हमारी मांग है कि केवल किसी गांव या क्षेत्र के कुल नुकसान के प्रतिशत को आधार न बनाया जाए, बल्कि प्रत्येक किसान के खेत का अलग-अलग निरीक्षण एवं वास्तविक फसल क्षति का आकलन किया जाए। छोटे एवं सीमांत किसानों को विशेष प्राथमिकता दी जाए। 33 प्रतिशत की शर्त पर पुनर्विचार किया जाए। यदि किसी किसान के खेत में 20, 25 या 30 प्रतिशत भी नुकसान हुआ है तो उसकी क्षति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। किसान की वास्तविक आर्थिक हानि को देखते हुए नियमानुसार राहत एवं मुआवजे का लाभ दिया जाए। धान की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में आई कमी का आकलन हो। दयाशंकर यादव ने बताया केि

कई किसानों के धान के पौधे गिर गए हैं तथा दाने की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। विशेष रूप से लंबे पौधे वाली धान की किस्मों में नुकसान अधिक हुआ है। ऐसी फसल की क्षति का भी सर्वेक्षण किया जाए, क्योंकि खेत में फसल खड़ी दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि किसान को उसकी पूरी उपज मिल जाएगी। फसल बीमा का लाभ वास्तविक किसानों को मिले। क्षेत्र के अनेक किसान किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से कृषि ऋण लेते हैं। उन्होंने कहा केि जिन किसानों का फसल बीमा प्रीमियम काटा गया है। उन्हें बीमा की शर्तों एवं पात्रता के अनुसार क्षतिपूर्ति दिलाई जाए। अधिकांश किसानों को यह जानकारी तक नहीं होती कि उनके खाते से फसल बीमा का प्रीमियम काटा गया है। इसलिए प्रशासन बैंकवार एवं किसानवार बीमा की स्थिति स्पष्ट कराए तथा पात्र किसानों के दावों की प्रक्रिया तत्काल शुरू कराए।  तत्काल विशेष सर्वेक्षण एवं मुआवजे की व्यवस्था हो। राजस्व विभाग, कृषि विभाग एवं बीमा कंपनियों की संयुक्त टीम गठित कर प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वेक्षण कराया जाए। सर्वेक्षण पारदर्शी हो तथा प्रत्येक प्रभावित किसान को उसकी वास्तविक क्षति के अनुसार नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। दोबारा बारिश होने से पहले नुकसान का आकलन किया जाए। आने वाले दिनों में पुनः बारिश होती है तो बची हुई फसल को भी भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए प्रशासन बिना विलंब किए सर्वेक्षण एवं राहत की कार्रवाई सुनिश्चित करे।

अतः श्रीमान जी से हमारी विनम्र लेकिन पुरजोर मांग है कि जमानिया तहसील के समस्त प्रभावित गांवों में तत्काल फसल क्षति का सर्वेक्षण कराया जाए।

प्रत्येक किसान के खेत का अलग-अलग आकलन किया जाए। छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाए।

33 प्रतिशत क्षेत्रफल की शर्त के कारण वास्तविक नुकसान झेलने वाले किसानों को राहत से वंचित न रखा जाए तथा शासन से आवश्यक शिथिलीकरण की संस्तुति की जाए। पात्र किसानों को फसल बीमा की क्षतिपूर्ति शीघ्र दिलाई जाए। प्रभावित किसानों को शासन के प्रावधानों के अनुसार तत्काल आर्थिक सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। सर्वेक्षण की रिपोर्ट एवं लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी भी पात्र किसान के साथ अन्याय न हो। किसान देश का अन्नदाता है। जब उसकी फसल ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो उसका परिवार कैसे सुरक्षित रहेगा? किसान सरकार से कोई एहसान नहीं मांग रहा है, बल्कि प्राकृतिक आपदा से हुई अपनी वास्तविक क्षति की भरपाई और अपने अधिकार की मांग कर रहा है। हम सभी किसान आशा करते हैं कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को संवेदनशीलता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करेगा, ताकि संकट की इस घड़ी में अन्नदाता को न्याय और राहत मिल सके। उक्त मौके पर अनिल कुमार यादव, रजनीश कुमार यादव सहित आदि लोग शामील रहे।