गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय (पीजी कॉलेज), गाजीपुर में छात्रवृत्ति के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कॉलेज प्रशासन के खिलाफ छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। दो दिवसीय हस्ताक्षर अभियान के समापन के बाद सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने छात्र नेताओं के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान 710 छात्र-छात्राओं के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को प्रेषित किया गया।

जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में अपर जिलाधिकारी मनीष चौहान को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई। इसके साथ ही जिलाधिकारी के नाम भी मांग पत्र सौंपा गया। छात्र नेताओं ने प्रशासन को सात दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र आमरण अनशन और व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।

प्राचार्य के बयान पर छात्र नेताओं ने उठाए सवाल

पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने कॉलेज प्राचार्य के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें अवैध वसूली से इनकार किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के आरोप गलत हैं तो कॉलेज प्रशासन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को दबाने के लिए मीडिया के सामने भ्रामक बयान दिए जा रहे हैं।

छात्र नेता आकाश चौधरी ने कहा कि शिक्षकों की आड़ में दलाली और कथित अवैध वसूली का खेल अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष कॉलेज परिसर में लिखित नोटिस के माध्यम से पैसे लिए गए थे, जबकि इस बार बाहर की दुकानों पर बायोमेट्रिक के नाम पर वसूली की जा रही है। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से इस व्यवस्था को तत्काल बंद कराने की मांग की।

वहीं, छात्र नेता प्रद्युम्न सिंह यादव 'राजन' ने कहा कि 710 छात्रों के हस्ताक्षर इस मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। छात्रों के आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

छात्र नेता निलेश बिंद और विकास यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क होनी चाहिए। छात्रों को अनावश्यक आर्थिक बोझ और मानसिक परेशानी से बचाने के लिए कॉलेज परिसर में ही सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

छात्रों की प्रमुख मांगें और सात दिन का अल्टीमेटम

छात्रों ने महामहिम राज्यपाल और जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाने, दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने और छात्रों से वसूली गई धनराशि वापस कराने की मांग उठाई है।

छात्रों का कहना है कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था कॉलेज परिसर में ही पूरी तरह निशुल्क और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाए, ताकि छात्रवृत्ति के नाम पर किसी भी छात्र का आर्थिक शोषण न हो सके।

छात्र नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे और आंदोलन को व्यापक रूप देंगे।

प्रदर्शन एवं ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय, प्रद्युम्न सिंह यादव 'राजन', आकाश चौधरी, निलेश बिंद, विकास यादव, अंकित भारद्वाज, विवेक, अखिलेश, पवन, मोहित, अभिमन्यु विश्वकर्मा, ऋतिक, सोनू यादव, बागी, विवेक यादव, अमन सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

अब निगाहें जिला प्रशासन और कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। छात्रों के 710 हस्ताक्षरों वाले ज्ञापन के बाद यह मामला शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है।