गाज़ीपुर से उर्फी रिज़वी की रिपोर्ट
गाजीपुर। साइबर अपराधियों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर ठगी करने के मामले में गाजीपुर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर एक व्यक्ति से ठगी करने वाले नेटवर्क की जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ित के खाते में अब तक 25 लाख 44 हजार 800 रुपये वापस कराए हैं। यह रकम पीड़ित की जीवनभर की मेहनत की कमाई और बेटी की शादी के लिए जुटाई गई बचत थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोराबाजार पीरनगर, स्ट्रीट नंबर-5, बड़ा महादेवा निवासी दिनेश सिंह पुत्र राजनरायण सिंह ने साइबर क्राइम थाना गाजीपुर में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल किया और खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने कहा कि जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, उसके पास से उनके नाम का आधार कार्ड मिला है और मोबाइल डिटेल में भी उनका नाम सामने आया है।
इस तरह कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर आरोपियों ने पीड़ित से बताए गए बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर करा लिए। भयभीत दिनेश सिंह ने इसकी जानकारी तत्काल अपने परिवार को भी नहीं दी। करीब एक महीने बाद जब उनकी बेटी घर पहुंची और पिता को परेशान देखा, तब उन्होंने पूरी घटना बताई। पीड़ित के अनुसार, साइबर अपराधियों ने उन्हें किसी को भी इस बारे में जानकारी न देने की हिदायत दी थी।
पीड़ित की तहरीर पर साइबर क्राइम थाना गाजीपुर में मुकदमा अपराध संख्या 25/2026 दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक गाजीपुर के पर्यवेक्षण में अपर पुलिस अधीक्षक नगर (नोडल साइबर) और पुलिस उपाधीक्षक साइबर के नेतृत्व में साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक रहमतुल्लाह खान, हेड कांस्टेबल रविकान्त जायसवाल तथा टीम ने मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत से संबंधित लगभग दो लाख रुपये फ्रीज कराए। इसके बाद ठगी की रकम के लेनदेन की कड़ियों को खंगालते हुए एक अन्य बैंक खाते में 24 लाख 99 हजार 800 रुपये फ्रीज कराए गए। संबंधित बैंक के नोडल अधिकारी और कानूनी टीम के साथ लगातार समन्वय एवं प्रयासों के बाद फ्रीज की गई धनराशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराई गई।
पुलिस के अनुसार, अब तक पीड़ित को कुल 25 लाख 44 हजार 800 रुपये वापस मिल चुके हैं। मामले की विवेचना जारी है और जांच में सामने आए बैंक खाताधारकों तथा मोबाइल नंबरों के संबंध में गहन पड़ताल की जा रही है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने साइबर थाना पुलिस की कार्यशैली और प्रयासों की सराहना करते हुए टीम का आभार व्यक्त किया।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराकर पैसे मांगना साइबर ठगी का तरीका है। ऐसे कॉल पर घबराकर किसी भी व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध वीडियो कॉल या धमकी मिलने पर नजदीकी थाने से संपर्क करें।
यदि किसी के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर क्राइम थाना गाजीपुर ने सहायता के लिए मोबाइल नंबर 7839864020 भी जारी किया है।
साइबर थाना टीम: प्रभारी निरीक्षक रहमतुल्लाह खान, हेड कांस्टेबल रविकान्त जायसवाल एवं साइबर क्राइम थाना गाजीपुर के समस्त कर्मचारीगण।
संदेश: सतर्क रहें, जागरूक रहें और सुरक्षित रहें।

